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Sri Lanka: बुरांश जैसे पेड़ों के बगीचे में माता सीता को रखा था रावण ने, ऐसा है फूल का रंग; इस बात से सभी हैरान
Mon, 10 Feb 2025 10:43 AM IST
हीरा मेहरा
गिरीश रंजन तिवारी
गिरीश रंजन तिवारी
Published by: हीरा मेहरा
Updated Mon, 10 Feb 2025 10:43 AM IST
सार
श्रीलंका में सीता माता को रावण ने जिस अशोक वाटिका में रखा था वहां उत्तराखंड के राज्य पुष्प बुरांश की तरह खिले फूलों की भरमार है।
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बुरांश
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
श्रीलंका के कैंडी में सीता माता को रावण ने जिस अशोक वाटिका में रखा था वहां उत्तराखंड के राज्य पुष्प बुरांश की तरह खिले फूलों की भरमार है। श्रीलंका के नुवारा एलिया जिले में स्थित अशोक वाटिका हकगला बॉटनिकल गार्डन क्षेत्र में है। यह पर्वत आज भी उसी रूप में हैं, जिसका रामायण में जिक्र है। यहां अशोक नाम के जो वृक्ष हैं, उनकी प्रकृति भारत में पाए जाने इस नाम के पेड़ से जुदा है। श्रीलंकाई अशोक के वृक्ष में बुरांश की तरह गुच्छे में ढेरों फूल फरवरी से अप्रैल के बीच आते हैं। अझेलिया प्रजाति के इन पेड़ों की पत्तियां भी बुरांश जैसी हैं। हालांकि राज्य पुष्प के लाल या सफेद रंग के उलट इनका रंग पीला होता है।
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सर्वत्र सिया और राम का बखान
जगह-जगह भारतीय परिधान में हाथों में फूल की थाली लिए महिलाएं मंदिर या बौद्ध मठ की ओर जाती नजर आती हैं। सर्वत्र राम, सीता, हनुमान की महिमा का बखान देखा सुना जा सकता है। श्रीलंका में चाय बागान लगाने के लिए अंग्रेज भारत से तमिल श्रमिकों को लाए थे। उन्हीं के वंशज आज श्रीलंका में आबादी का बड़ा हिस्सा हैं। बौद्ध धर्म भी यहां व्यापक रूप से प्रचलित हैं।
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कदम-कदम पर भारतीय संस्कृति की झलक
श्रीलंका में मंदिरों की भरमार है जिनमें गणेश, शिव, राम, लक्ष्मण, सीता, हनुमान आदि की बहुत ही सुंदर मूर्तियां स्थापित हैं और नियमित रूप से पूजा-अर्चना होती है। लोगों का रहन-सहन, खान-पान, पहनावा पूरी तरह से भारतीय है। ज्यादातर दुकानों, प्रतिष्ठानों के नाम भी भारतीय हैं। सर्वाधिक बोली जाने वाली और दोनों राजभाषाओं सिंहली और तमिल का उदय भारत में ही हुआ है।
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जहां जली थी लंका आज भी वह क्षेत्र हैं काला...
श्रीलंका में राम, रावण, सीत और हनुमान से जुड़े तमाम चिह्न हैं। इनमें रावण का महल, रावण फॉल और राम-रावण युद्ध स्थल युद्धगनावा, सीता का मंदिर आदि शामिल हैं। यहां एक क्षेत्र पूरी तरह काला है, जिसके बारे में लोगों का कहना है कि इसी जगह बजरंगबली ने रावण का महल जलाया था। अशोक वाटिका के जिस क्षेत्र को हनुमान जी ने उजाड़ा था, वह जगह आज भी वीरान है जबकि इससे ठीक नीचे घना जंगल हैं।