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दिव्यांग बच्चों को दिशा देते हैं राजेंद्र ‘अंकल’
धन सिंह बिष्ट, हल्द्वानी।
Updated Sun, 15 May 2016 11:56 PM IST
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राजेंद्र अंकल
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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नवाबी रोड निवासी राजेंद्र सिंह नेगी के मन में बीमार पिता की लाचारी और परिवार की गरीबी ने सेवा का ऐसा जज्बा भरा कि उन्होंने अपनी उम्र का एक लंबा समय दिव्यांगों की सहायता और निराश्रित बच्चों की शैक्षिक बुनियाद को मजबूत करने में लगा दिया। 24 सालों से लगातार लोगों की सेवा कर रहे अंकल आज पूरी तरह लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बन गये हैं। बच्चों को शिक्षा और युवाओं को संस्कार देने के कारण शहर में वह ‘अंकल’ के नाम से जाने जाते हैं।
छात्र जीवन में अपने साथियों को झगड़े फसाद और नशे से दूर रहने की शिक्षा देने पर साथी राजेंद्र नेगी को अंकल कह कर संबोधित करने लगे। इसी बीच एक सड़क दुर्घटना में बुरी तरह घायल होेने के बाद उनके पिता ने 22 वर्षों तक मानसिक व शारीरिक विकलांगता की पीड़ा झेली। इस लंबे समय में पिता की सेवा करते हुए अंकल ने विकलांगता के दर्द को महसूस किया और उनकी सेवा में जुट गए। जिसके लिए उन्होंने 1990 में विकलांग कल्याण समिति का गठन किया।
तब से अब तक समिति 92 दिव्यांगों को व्हील चेयर, 160 को ट्राई रिक्शा, 1745 को वैशाखियां, 135 को श्रवण यंत्र के साथ ही 2400 महिलाओं को निशुल्क सिलाई मशीन दे चुकी है। इसके लिए नेगी ने न तो कोई सरकारी मदद ली, न ही किसी तरह का चंदा। नेगी बताते हैं कि पिता की बीमारी के दौरान परिवार को गरीबी का भी दंश झेलना पड़ा। बड़ी मुश्किल से वह अपनी ग्रेजुएशन की शिक्षा पूरी कर पाये, जिसे देखते हुए उन्होंने निराश्रित बच्चों को शिक्षा में मदद करने का संकल्प लिया और वर्ष 2000 से अब तक प्रति वर्ष चार सौ निराश्रित बच्चों को कापी किताब, ड्रेस आदि निशुल्क दे रहे हैं। यूं तो नेगी मेहता चेरिटेबल ट्रस्ट के कर्मचारी हैं, लेकिन समाज सेवा के लिए ट्रस्ट भी उन्हें पूरा समय देता है। समाज सेवा के लिए नेगी को विभिन्न संस्थाओं द्वारा 41 बार सम्मानित भी किया जा चुका है।
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छात्र जीवन में अपने साथियों को झगड़े फसाद और नशे से दूर रहने की शिक्षा देने पर साथी राजेंद्र नेगी को अंकल कह कर संबोधित करने लगे। इसी बीच एक सड़क दुर्घटना में बुरी तरह घायल होेने के बाद उनके पिता ने 22 वर्षों तक मानसिक व शारीरिक विकलांगता की पीड़ा झेली। इस लंबे समय में पिता की सेवा करते हुए अंकल ने विकलांगता के दर्द को महसूस किया और उनकी सेवा में जुट गए। जिसके लिए उन्होंने 1990 में विकलांग कल्याण समिति का गठन किया।
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तब से अब तक समिति 92 दिव्यांगों को व्हील चेयर, 160 को ट्राई रिक्शा, 1745 को वैशाखियां, 135 को श्रवण यंत्र के साथ ही 2400 महिलाओं को निशुल्क सिलाई मशीन दे चुकी है। इसके लिए नेगी ने न तो कोई सरकारी मदद ली, न ही किसी तरह का चंदा। नेगी बताते हैं कि पिता की बीमारी के दौरान परिवार को गरीबी का भी दंश झेलना पड़ा। बड़ी मुश्किल से वह अपनी ग्रेजुएशन की शिक्षा पूरी कर पाये, जिसे देखते हुए उन्होंने निराश्रित बच्चों को शिक्षा में मदद करने का संकल्प लिया और वर्ष 2000 से अब तक प्रति वर्ष चार सौ निराश्रित बच्चों को कापी किताब, ड्रेस आदि निशुल्क दे रहे हैं। यूं तो नेगी मेहता चेरिटेबल ट्रस्ट के कर्मचारी हैं, लेकिन समाज सेवा के लिए ट्रस्ट भी उन्हें पूरा समय देता है। समाज सेवा के लिए नेगी को विभिन्न संस्थाओं द्वारा 41 बार सम्मानित भी किया जा चुका है।
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