विश्वविद्यालय प्रशासन पर उठे सवाल
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हल्द्वानी। कुमाऊं विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव आनन-फानन में कराने को लेकर एक बार फिर विश्वविद्यालय प्रशासन सवालों के घेरे में है। छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने साजिश के तहत नामांकन और चुनाव में कोई समय नहीं दिया ताकि एक विशेष छात्रसंगठन को फायदा पहुंचाया जा सके। कुमाऊं भर के डिग्री कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव 12 अक्तूबर तक हुए हैं। इसके बाद कुमाऊं विश्वविद्यालय छात्र महासंघ के चुनाव अमूमन कम से 10 से 15 दिनों के बाद होते रहे हैं ताकि छात्रसंगठन प्रत्याशी का चयन कर चुनाव की तैयारी कर सकें, लेकिन इस बार विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रसंगठनों को मौका ही नहीं दिया। चुनाव के लिए 16 अक्तूबर को नामांकन की तिथि और 17 अक्तूबर को चुनाव की तिथि तय कर दी। छात्रनेताओं का कहना है कि कुमाऊं भर के डिग्री कालेजों में निर्वाचित विश्वविद्यालय प्रतिनिधि छात्रमहासंघ चुनाव में भाग लेते हैं क्या एक दिन में कोई भी प्रत्याशी कुमाऊं भर के डिग्री कालेजों के विवि प्रतिनिधियों से संपर्क कर सकता है।
गुटबाजी का असर, मैदान छोड़ भागी एनएसयूआई
हल्द्वानी। छात्र महासंघ चुनाव में अध्यक्ष पद पर प्रत्याशी उतारने से पहले ही एनएसयूआई मैदान छोड़कर भाग गई। इसकी मुख्य वजह एनएसयूआई की गुटबाजी को माना जा रहा है। नामांकन की प्रक्रिया शुरू होने पर एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष सचिन जलाल और दूसरे नेता तो नैनीताल पहुंचे लेकिन कोई दमदार प्रत्याशी मैदान में नहीं उतार सके। अध्यक्ष पद के लिए गोविंद दसौनी का नामांकन इसलिए नहीं हो पाया कि एमबीपीजी कालेज में उसकी फीस जमा नहीं थी। दूसरा प्रत्याशी रोहित बहुगुणा को बनाने की कोशिश की गई तो वह भी नहीं मिला। कुमाऊं विश्वविद्यालय छात्रमहासंघ के पूर्व अध्यक्ष रविंद्र प्रताप सिंह रावत कहते हैं कि चुनाव में एनएसयूआई की ओर से प्रत्याशी न उतारा जाना शर्मनाक है। संगठन ने प्रत्याशी का चयन करने को लेकर कोई तैयारी तक नहीं की। एमबी कॉलेज के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष देवेंद्र नेगी ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर सत्ता के दबाव में आनन फानन में चुनाव कराने का आरोप लगाया है।