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जेंडर समानता को बढ़ावा दे मीडिया
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, नैनीताल।
Updated Thu, 04 Feb 2016 01:39 AM IST
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देश में महिलाओं के साथ भेदभाव मिटाने तथा उन्हें विकास के समान अवसर उपलब्ध कराने में मीडिया अहम भूमिका निभा सकता है। बाजारीकरण औैर व्यावसायिकता के प्रभाव में मीडिया भी महिलाओं संबंधी रिपोर्टिंग में अक्सर भेदभाव व पक्षपात करता है।
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यह निष्कर्ष यहां विमर्श संस्था की ओर से आयोजित जेंडर समानता तथा मीडिया संबंधी राज्य स्तरीय परिचर्चा में सामने आया। दो सत्रों में संपन्न परिचर्चा में महिला समाख्या की निदेशक गीता गैरोला ने कहा कि तमाम राजनैतिक निर्णय जो महिलाओं के लिए हानिकारक थे मीडिया के प्रभाव में बदले गए हैं।
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उत्तराखंड महिला मंच की प्रतिनिधि डा. शीला रजवार ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन से आज तक राज्य के विकास में महिलाओं की भूमिका की चर्चा की। उत्तराखंड मुक्त विवि के प्राध्यापक भूपेंद्र ने मीडिया में व्यावसायिक घरानों के बढ़ते दखल पर चिंता जताई।
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कार्यक्रम अधिकारी कविता भटनागर ने महिलाओं की उपलब्धियों की रिपोर्टिंग को महत्व देने की अपील की। गजेंद्र रौतेला ने कहा कि मीडिया महिलाओं के उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
पत्रकार डा. गिरीश रंजन तिवारी ने कहा कि महिलाओं के कल्याण संबंधी तमाम योजनाओं की जानकारी के अभाव में महिलाएं उनका लाभ नहीं ले पातीं। लखनऊ से आए पत्रकार नसीरूद्दीन ने महिलाओं संबंधी रिपोर्टिंग में महिलाओं को दोषी दर्शाने की प्रवृति को गलत बताया।
परिचर्चा का संचालन विमर्श संस्था की निदेशक कंचन भंडारी ने किया। परिचर्चा में डा. बसंती पाठक, चंपा उपाध्याय, भूपेश कन्नौजिया, तरूण जोशी, सुनीता साही, मोहन कार्की आदि ने विचार रखे। इस दौरान उत्तरा की डा. उमा पाठक समेत विभिन्न समाचार पत्रों व इलेक्ट्रानिक मीडिया के प्रतिनिधि मौजूद थे।
परिचर्चा में महिलाओं संबंधी रिपोर्टिंग में कुछ तथ्यों पर गौर करने की सलाह दी गई। गीता गैरोला ने कहा कि शादीशुदा महिला को प्रेमी द्वारा भगा ले जाने पर दो बच्चों की मां प्रेमी संग फुर्र जैसी हैडिंग न लिखें जो केवल महिला को दोषी दर्शाती हो।
पत्रकार डा. गिरीश रंजन तिवारी ने कहा कि जब झूठी प्रतिष्ठा के लिए पति या भाई ही परिवार की युवती की नृशंस हत्या कर देता है तो इससे बड़ा हॉरर क्या हो सकता है। मीडिया उसे आनर किलिंग लिखकर महिमामंडित करने के बजाए हॉरर किलिंग लिखे तो बेहतर हैे।
नसीरूद्दीन ने कहा कि रेप पीड़िता महिला की पहचान अक्सर मीडिया उसके घर के पते या पिता के नाम से लीक कर देता है जिससे महिला को दोहरी सजा मिलती है इससे बचना चाहिए।
कविता भटनागर ने कहा कि यदि महिला शराब के नशे में देखी जाय तो मीडिया उसे चटपटी खबर बनाता है जबकि हजारों पुरुष शराब पीकर हुड़दंग करते रहते हैं तो खबर नहीं बनती।
वक्ताओं ने आपत्ति की कि यदि कोई महिला कितनी भी बड़ी उपलब्धि हासिल कर ले मीडिया उसे तभी तवज्जो देता है जब वो ग्लैमरस भी लगे।