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पहली बार ड्रोन के जरिये पहाड़ में हरियाली बढ़ाने की तैयारी

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Fri, 17 Dec 2021 01:36 AM IST
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Preparations to increase greenery in the mountain through drones for the first time
हल्द्वानी। प्रदेश में पहली बार हरियाली बढ़ाने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल करने की तैयारी की जा रही है। वन विभाग की रिसर्च एडवाइजरी कमेटी (आरएसी) ने वन अनुसंधान की योजना पर मोहर लगा दी है। मुख्य वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी के अनुसार इसके लिए पिथौरागढ़ और चमोली जिले में पायलट प्रोजेक्ट के तहत काम किया जाएगा।
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वन विभाग दो तरह से पौधरोपण का काम करता है। पहला बीज बुआन विधि है। इसमें खेत की तरह जमीन को तैयार कर मिश्रित प्रजाति के बीजों का छिड़काव होता है। दूसरी विधि में तैयार पौधे को जंगल में लगाना होता है। चट्टानी इलाकों में वन कर्मियों की पहुंच आसान न होने से वहां पौधरोपण नहीं हो पाता। ऐसे स्थानों पर हरियाली बढ़ाने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जाना है। इसके तहत बीजों का पोषक तत्वों के साथ ड्रोन के जरिये ऐसे इलाकों में छिड़काव किया जाएगा। दुर्गम और वनस्पति विहीन इलाकों में यह विधि हरियाली बढ़ाने में कारगर समझी जा रही है। इसके लिए प्रदेश में दो जिले पिथौरागढ़ और चमोली का चयन किया गया है। इस कार्य के लिए वन अनुसंधान को बजट भी मिला है।
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ऐसे होगा योजना पर काम
हल्द्वानी। मुख्य वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी के अनुसार ड्रोन के जरिये ऐसे इलाकों में सीड बॉल (बीज को न्यूट्रिशन वैल्यू वाली चीजों से मिलाकर तैयार किया जाता है) को पहुंचाया जाए। मिट्टी में मिलकर इन बीजों के प्राकृतिक तौर पर अंकुरित होने और बढ़ने की प्रक्रिया शुरू होगी। ड्रोन संबंधित इलाके की जीपीएस लोकेशन भी लेगा। इससे भविष्य में पौधों की देखरेख और निगरानी में भी मदद मिलेगी।
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क्या तैयारी की गई है
हल्द्वानी। सीसीएफ के अनुसार वन कर्मियों को एफआरआई के माध्यम से सीड बॉल तैयार करने की ट्रेनिंग दिलाई जा चुकी है। सीड बॉल बनाने में उन बीजों का चयन किया जाता है जो स्थानीय प्रजाति के होते हैं। वह ज्यादा समय तक और प्रतिकूल परिस्थिति में भी टिक सकें। ड्रोन को लेकर कुछ बदलाव करना होगा। वह करीब आधा से एक किलो तक सीड बॉल ले जा सके और आधा घंटे तक आसानी से कार्य कर सके। इसमें कई संस्थानों से मदद प्राप्त की जा रही है। अगले मानसून में ड्रोन के जरिये प्लांटेशन से जुड़ा काम करने का लक्ष्य रखा गया है।

यह कोशिश भी सफल रही
हल्द्वानी। वन अनुसंधान ने जापान की मियावाकी तकनीक से हरियाली (मिश्रित वनों को तैयार करना) बढ़ाने के लिए वर्ष-2018 रानीखेत, तराई (पीपल पड़ाव) के क्षेत्रों में प्रयोग किया था। बाद में भाबर क्षेत्र के ट्रायल हुआ। वन अनुसंधान के लालकुआं क्षेत्र के वन क्षेत्राधिकारी मदन बिष्ट ने बताया कि यह प्रयोग काफी सफल रहा है। पौधों की बढ़त तुलनात्मक तौर पर काफी अच्छी रही है।
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