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परिणाम का अनुमान लगाने में राजनीति के धुरंधर भी हारे

Thu, 16 Feb 2017 01:39 AM IST
चंद्रेश पांडे
चंद्रेश पांडे Updated Thu, 16 Feb 2017 01:39 AM IST
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Predict the outcome of politics also lost ace
जिला परिषद चुनाव - फोटो : अमर उजाला

भीमताल विधानसभा सीट पर मुकाबला बेहद रोमांचक नजर आ रहा है। कुछ लोगों का मानना है कि इस सीट पर भाजपा और कांग्रेस की सीधी टक्कर है जबकि कई लोगों का मानना है कि निर्दलीय राम सिंह कैड़ा और बसपा प्रत्याशी तारादत्त पांडे द्वारा की गई सेंधमारी के चलते भाजपा और कांग्रेस की सीधी टक्कर का गणित बिगड़ चुका है।

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ऐसे में परिणाम को लेकर स्थिति बेहद असमंजसपूर्ण है। राजनीति से जुड़े लोगों का मानना है कि चतुष्कोणीय मुकाबले में हार जीत का अंतर बेहद कम होगा और उसी प्रत्याशी के सिर जीत का सेहरा बंधेगा जो हर बूथ से वोट बटोरने में सफल रहा होगा। इस बार भीमताल सीट पर पिछले चुनाव की तुलना में 2.65 फीसदी कम मतदान हुआ है। पिछली बार कुल 65 फीसदी वोट पड़े थे।
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बताते चलें कि भीमताल विधानसभा सीट में कुल 95 हजार 677 मतदाता हैं बुधवार को विधानसभा क्षेत्र के कुल 151 पोलिंग बूथों में कुल 62.36 फीसदी मतदान हुआ है। विधानसभा क्षेत्र पर ब्लॉकवार नजर डाली जाए तो पता चला कि जो प्रत्याशी जहां का रहने वाला है उसका पलड़ा अपने क्षेत्र में भारी रहा है।
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ऐसे में रामगढ़ ब्लॉक में कांग्रेस का पंजा भारी पड़ा जबकि भाजपा का कमल, बसपा का हाथी और निर्दलीय राम सिंह कैड़ा यहां दूसरे और तीसरे स्थान पर संघर्ष करते दिखे।

इसी तरह ओखलकांडा ब्लॉक के 50 फीसदी बूथों में निर्दलीय कैड़ा की अंगूठी ने खूब वोट बटोरे जबकि कांग्रेस व भाजपा दूसरे और तीसरे स्थान के लिए संघर्ष करते दिखे। ओखलकांडा के अनुसूचित बाहुल्य क्षेत्रों में हाथी ने भी वोटों में खूब सेंधमारी की।

धारी ब्लॉक के कुछ गांवों में हाथी अव्वल नजर आया तो कहीं कांग्रेस का पंजा भारी पड़ा। भाजपा के कमल और निर्दलीय कैड़ा को यहां तीसरे और चौथे स्थान पर संघर्ष करते देखा गया। इसी तरह भीमताल नगर और ग्रामीण क्षेत्र में कांग्रेस और भाजपा बराबरी पर दिखे जबकि कुछ बूथों में बसपा और कैड़ा ने कांग्रेस व भाजपा के वोटों में सेंधमारी की।


नोटबंदी तो यहां मुद्दा नहीं बनी अलबत्ता दलबदल के चलते वोटों का ध्रुवीकरण जरूर हुआ है। लिहाजा ऐसे में राजनीति के धुरंधर भी यह बताने की स्थिति में नहीं हैं कि असल फाइट किस-किस के बीच है और जीत का सेहरा किसके सिर बंधेगा। तमाम अनुमान लगाने के बावजूद राजनति के धुरंधर बस इतना ही कह पा रहे हैं कि हार जीत किसी की भी हो हार जीत का अंतर बेहद कम रहेगा।

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