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Uttarakhand: दो साल के बच्चे का मोह छोड़ आंदोलन में कूद गया था राम भक्त, पढ़ें संघर्ष की कहानी

Tue, 16 Jan 2024 05:30 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल Published by: हीरा मेहरा Updated Tue, 16 Jan 2024 05:30 PM IST
सार

1990 में राम मंदिर के लिए आंदोलन चरम पर था। उस दौरान हल्द्वानी के प्रकाश हर्बोला ने आंदोलन में शामिल होने का निर्णय लिया। खबर में पढ़िए उनके संघर्ष की कहानी...

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Prakash Herbola left the attachment of two year old child and jumped into the movement in haldwani
ram mandir - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुखानी निवासी कार सेवक प्रकाश हर्बोला 1990 में करीब 34 साल के रहे होंगे। उस समय राम मंदिर के लिए आंदोलन चरम पर था। उस दौरान उनके घर बेटा हुआ था, लेकिन उनके मन में तो राम बसे थे। हल्द्वानी समेत कुमाऊं से 136 कार सेवकों ने अयोध्या जाने का निर्णय लिया तो प्रकाश भी उनमें शामिल हो गए। हीरानगर से कारसेवक चले ही थे कि पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। 

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पुलिस कारसेवकों को एचएन इंटर कॉलेज ले गई। शाम को बसों में भरकर उन्हें अल्मोड़ा ले जाया गया लेकिन वहां जेल में जगह नहीं मिली तो हवालबाग और उसके बाद मजखाली ले गए। मजखाली में 23 कार सेवकों को उतार दिया गया। 
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बाकियों को अगले दिन बस से बागेश्वर के डिग्री कॉलेज में बनी अस्थायी जेल में बंद कर दिया गया। कार सेवक प्रकाश बताते हैं कि यहां अन्य स्थानों से भी कार सेवक लाए गए थे। जेल में कच्चा खाना दिया जाता था। इसके खिलाफ उनके नेतृत्व में सभी ने भूख हड़ताल कर दी। अल्मोड़ा डीएम समेत कई अधिकारी मनाने पहुंचे लेकिन कार सेवकों ने हड़ताल जारी रखी। 
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अंत में जेलर ने निर्णय लिया कि कार सेवक अपना खाना स्वयं बनाएंगे और इसके लिए राशन उपलब्ध कराया गया। तब भूख हड़ताल टूटी। इस दौरान दो कार सेवक अस्पताल भर्ती भी रहे। 30 नवंबर को अयोध्या में कार सेवकों पर गोली चलने की सूचना मिली तो कार सेवक बागेश्वर की अस्थायी जेल से भाग निकले और बाजार में तोड़फोड़ शुुरू कर दी। बाद में पुलिस ने उन्हें फिर पकड़ लिया। जेल में रहने के दौरान कार सेवकाें ने हनुमान चालीसा का पाठ किया और संघ की शाखा का संचालन भी किया।

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