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प्रदीप टम्टा के लिए दबाव भी सह गए रावत
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
Updated Mon, 30 May 2016 11:16 PM IST
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सोमवार को यह भी साबित हुआ कि राज्ससभा में पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा को पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री हरीश रावत अपने मंत्रियों का दबाव भी सहने को तैयार हैं। रविवार को राजस्व मंत्री यशपाल आर्य के साथ मुख्यमंत्री हरीश रावत की बैठक में ही यह तय हो गया था कि ऊधमसिंह नगर में राजस्व मंत्री राजस्व मंत्री यशपाल आर्य की पसंद के अधिकारियों की तैनाती होगी।
सोमवार को ऊधमसिंह नगर के डीएम और एसएसपी को बदलकर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इसे पुष्ट भी कर दिया। इसी तरह पीडीएफ को भी रावत मनाने में सफल रहे हैं। अब प्रदीप टम्टा का राज्यसभा जाना साफ है। अब यह भी साफ है कि ऐसे हर मौके पर रावत को दबाव की राजनीति का सामना भी करना पड़ेगा।
उत्तराखंड से राज्यसभा के लिए प्रदीप टम्टा का नाम सामने आने पर राजस्व मंत्री यशपाल आर्य और पीडीएफ कोटे के मंत्री दिनेश धनै की नाराजगी सामने आई थी। आर्य के बारे में कहा गया कि वे अपने लिए टिकट की मांग कर रहे हैं। धनै के बारे में कहा गया कि वे पीडीएफ से सहमति न लिए जाने के कारण नाराज हैं। रविवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने दोनों से अलग-अलग बात की तो नाराजगी की असल वजह भी सामने आ गई। आर्य ऊधमसिंह नगर में अपने पसंद के अधिकारियों की पोस्टिंग चाह रहे थे। धनै की नाराजगी एक अधिकारी को लेकर थी।
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हरीश रावत ने इन दोनों की बात मानकर प्रदीप टम्टा के लिए राह जरूर आसान कर दी, लेकिन कुमाऊं की राजनीति में अपने समीकरण भी अब रावत ने बदल दिए हैं। प्रदीप टम्टा का नामांकन होना अब करीब-करीब तय हो गया है। ऐसे में प्रदीप टम्टा राज्यसभा पहुंचते हैं तो हरीश रावत को अब गढ़वाल-कुमाऊं के संतुलन के सवाल का सामना करना पड़ेगा। कुमाऊं से राज्यसभा में कांग्रेस के दो नेता होंगे और खुद मुख्यमंत्री हरीश रावत भी कुमाऊं से प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी भी कुमाऊं के खाते में हैं। ऐसे में गढ़वाल के नाम पर कांग्रेस का महाराज समर्थक धड़ा मुखर हो सकता है। रावत को अब इस चुनौती का सामना भी करना पड़ सकता है।
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सोमवार को ऊधमसिंह नगर के डीएम और एसएसपी को बदलकर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इसे पुष्ट भी कर दिया। इसी तरह पीडीएफ को भी रावत मनाने में सफल रहे हैं। अब प्रदीप टम्टा का राज्यसभा जाना साफ है। अब यह भी साफ है कि ऐसे हर मौके पर रावत को दबाव की राजनीति का सामना भी करना पड़ेगा।
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उत्तराखंड से राज्यसभा के लिए प्रदीप टम्टा का नाम सामने आने पर राजस्व मंत्री यशपाल आर्य और पीडीएफ कोटे के मंत्री दिनेश धनै की नाराजगी सामने आई थी। आर्य के बारे में कहा गया कि वे अपने लिए टिकट की मांग कर रहे हैं। धनै के बारे में कहा गया कि वे पीडीएफ से सहमति न लिए जाने के कारण नाराज हैं। रविवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने दोनों से अलग-अलग बात की तो नाराजगी की असल वजह भी सामने आ गई। आर्य ऊधमसिंह नगर में अपने पसंद के अधिकारियों की पोस्टिंग चाह रहे थे। धनै की नाराजगी एक अधिकारी को लेकर थी।
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हरीश रावत ने इन दोनों की बात मानकर प्रदीप टम्टा के लिए राह जरूर आसान कर दी, लेकिन कुमाऊं की राजनीति में अपने समीकरण भी अब रावत ने बदल दिए हैं। प्रदीप टम्टा का नामांकन होना अब करीब-करीब तय हो गया है। ऐसे में प्रदीप टम्टा राज्यसभा पहुंचते हैं तो हरीश रावत को अब गढ़वाल-कुमाऊं के संतुलन के सवाल का सामना करना पड़ेगा। कुमाऊं से राज्यसभा में कांग्रेस के दो नेता होंगे और खुद मुख्यमंत्री हरीश रावत भी कुमाऊं से प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी भी कुमाऊं के खाते में हैं। ऐसे में गढ़वाल के नाम पर कांग्रेस का महाराज समर्थक धड़ा मुखर हो सकता है। रावत को अब इस चुनौती का सामना भी करना पड़ सकता है।