फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   Policy will be made to hand over the developed tea garden to the tenants

विकसित चाय बागान काश्तकारों को सौंपने को बनेगी नीति

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sun, 31 Jan 2021 11:05 PM IST
विज्ञापन
Policy will be made to hand over the developed tea garden to the tenants
प्रतीकात्मक फोटो।
अल्मोड़ा। उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड काश्तकारों की मांग पर विकसित किए गए चाय बागानों को किसानों को सौंपने की योजना बना रहा है। बोर्ड इसके लिए शासन के नियोजन विभाग की मदद से नीति तैयार कर रहा है। शुरुआत में 15 साल पुराने 300 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले चाय बागान किसानों को लौटाए जाएंगे।
विज्ञापन

उत्तराखंड में चाय विकास परियोजना वर्ष 1993-94 में शुरू हुई। अलग राज्य बनने के बाद उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड का गठन हुआ। उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड किसानों की भूमि तीस साल तक लीज पर लेकर चाय बागान विकसित करता है। शुरुआत में लीज में लिए गए बगीचों की अवधि वर्ष 2024 में पूरी होगी। कई इलाकों में जहां बोर्ड ने चाय बागान विकसित कर दिए हैं, वहां के किसान अब उनकी भूमि में विकसित किए गए बागानों को उन्हें सौंपने की मांग कर रहे हैं। शासन की नई नीति के अनुसार अब पंद्रह से बीस साल पहले विकसित किए गए चाय बागानों को किसानों को वापस सौंपने की योजना है। बागान वापस करने को लेकर नीति तैयार करने के लिए पिछले माह देहरादून में अपर मुख्य सचिव शासन स्तर पर बोर्ड के अधिकारियों की बैठक ले चुकी हैं।
विज्ञापन

इसके तहत प्रथम चरण में जिन स्थानों पर चाय बागान विकसित किए पंद्रह साल से अधिक हो गए हैं। उन बागानों को किसानों को लौटाने की योजना बनाई जा रही है। बोर्ड के वित्त अधिकारी अनिल खोलिया ने बताया कि चाय उत्पादक काश्तकारों को बागान वापस करने और भविष्य में नए चाय बागान लगाने के लिए शासन के नियोजन विभाग और पीपीपी सैल के सहयोग से नीति तैयार की जा रही है। इसको लेकर काश्तकारों से भी सुझाव लिए जा रहे हैं। नियोजन विभाग और बोर्ड के अधिकारियों की टीम बागानों में जाकर मौके पर ही किसानों की राय भी लेगी। काश्तकार इस संबंध में सुझाव 20 फरवरी तक अपने निकटतम चाय बागान के कार्यालय या निदेशक उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड कार्यालय धारानौला अल्मोड़ा को भी भेज सकते हैं। बागान लौटाने के बाद भी बोर्ड किसानों को अनुदान और सभी तकनीकी सहायता उपलब्ध कराएगा। किसानों को अपने बागानों में उत्पादित चाय की पत्तियां बोर्ड की फैक्ट्रियों में बेचनी होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed