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जारी होगी कमीशन एजेंट की नीति
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
Updated Sun, 22 Oct 2017 12:50 AM IST
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हल्द्वानी। धान खरीद में कच्चा आढ़त (कमीशन एजेंट) नीति को फिर से लागू करने की तैयारी है। चावल मिल मालिकों के साथ हुई बैठक में इस पर फैसला भी हो चुका है। चावल घोटाला सामने आने के बाद सरकार ने इसी नीति को लागू करने से हाथ पीछे खींच लिया था। बताया जा रहा है कि ऊधमसिंह नगर में चावल मिल मालिकों के हड़ताल पर जाने की वजह से सरकार को बैकफुट पर आना पड़ रहा है।
सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री ने दीपावली से पूर्व चावल मिल मालिकों के साथ बैठक की थी। बैठक में चावल मिलों ने हो रहे घाटे और धान नहीं खरीदने का कारण बताया। चावल मिल मालिकों की मांग थी कि पुरानी नीति पर ही धान खरीद की जाए। इनकी ओर से पुरानी नीति के आधार पर धान खरीद न होने पर कोई भी धान खरीद न करने का भी ऐलान किया गया।
माना जा रहा है कि चावल मिल मालिकों की इसी धमकी ने सरकार को बैक फुट पर आने के लिए विवश किया। सरकार की ओर से कच्चा आढ़तियों के जरिये धान खरीद शुरू किए जाने का आश्वासन दिया गया है। बताया जा रहा है कि एक-दो दिन में ही इस नीति को जारी भी कर दिया जाएगा।
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ऊधमसिंह नगर का चावल घोटाला सामने आने के बाद ही सरकार ने इस बार की धान खरीद में कच्चा आढ़तियों के जरिये खरीद पर चुप्पी साध ली थी। मंत्रिमंडल ने जिस धान खरीद नीति को मंजूरी दी, उसमें कच्चा आढ़त के मामले का जिक्र ही नहीं था। उस समय भी यही कहा गया कि इस पर सरकार बाद में फैसला लेगी।
इससे चावल मिल मालिक भी दबाव में हैं। प्रदेश में चावल मिल मालिकों को ही कमीशन एजेंट भी नियुक्त कर धान खरीद के लिए अधिकृत किया जाता रहा है। ऐसे में कमीशन एजेंट के रूप मेें चावल मिल मालिक धान की खरीद भी करते रहे हैं और भी इस धान को कूट कर सार्वजनिक वितरण प्रणाली में खाद्य विभाग को देते आए हैं।
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सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री ने दीपावली से पूर्व चावल मिल मालिकों के साथ बैठक की थी। बैठक में चावल मिलों ने हो रहे घाटे और धान नहीं खरीदने का कारण बताया। चावल मिल मालिकों की मांग थी कि पुरानी नीति पर ही धान खरीद की जाए। इनकी ओर से पुरानी नीति के आधार पर धान खरीद न होने पर कोई भी धान खरीद न करने का भी ऐलान किया गया।
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माना जा रहा है कि चावल मिल मालिकों की इसी धमकी ने सरकार को बैक फुट पर आने के लिए विवश किया। सरकार की ओर से कच्चा आढ़तियों के जरिये धान खरीद शुरू किए जाने का आश्वासन दिया गया है। बताया जा रहा है कि एक-दो दिन में ही इस नीति को जारी भी कर दिया जाएगा।
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ऊधमसिंह नगर का चावल घोटाला सामने आने के बाद ही सरकार ने इस बार की धान खरीद में कच्चा आढ़तियों के जरिये खरीद पर चुप्पी साध ली थी। मंत्रिमंडल ने जिस धान खरीद नीति को मंजूरी दी, उसमें कच्चा आढ़त के मामले का जिक्र ही नहीं था। उस समय भी यही कहा गया कि इस पर सरकार बाद में फैसला लेगी।
इससे चावल मिल मालिक भी दबाव में हैं। प्रदेश में चावल मिल मालिकों को ही कमीशन एजेंट भी नियुक्त कर धान खरीद के लिए अधिकृत किया जाता रहा है। ऐसे में कमीशन एजेंट के रूप मेें चावल मिल मालिक धान की खरीद भी करते रहे हैं और भी इस धान को कूट कर सार्वजनिक वितरण प्रणाली में खाद्य विभाग को देते आए हैं।