पुलिस की सख्ती: बलपूर्वक उठाया, बर्गर खिलाकर अनशन तुड़वाया और छोड़ दिया; महिलाओं के कपड़े फटे, कई लोग चोटिल
उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के नेता भूपेंद्र कोरंगा को, यूकेएसएसएससी पेपर लीक के विरोध में चल रहे उनके आमरण अनशन से पुलिस ने सोमवार को जबरन उठाया। उन्हें अस्पताल ले जाकर जांच की गई, इसके बाद एक रेस्टोरेंट में बर्गर खिलाकर उनका अनशन तुड़वाया गया।
विस्तार
यूकेएसएसएससी का पेपर लीक प्रकरण के विरोध में आमरण अनशन पर बैठे उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष भूपेंद्र कोरंगा को पुलिस ने सोमवार को जबरन उठा लिया। उन्हेंं एंबुलेंस से सुशीला तिवारी अस्पताल ले जाया गया। वहां जांचों के बाद पुलिस ने उन्हें रेस्टोरेंट में बर्गर खिलाकर अनशन तुड़वाया और फिर सुरक्षित आंदोलन स्थल पहुंचा दिया। इससे पहले पुलिस पर बुद्धपार्क में अमानवीयता दिखाते हुए युवाओं को घसीटने और महिला के कपड़े फाड़ने के आरोप लगे हैं। पुलिस की कार्रवाई से पार्षद समेत कई महिलाओं को हल्की-फुल्की चोटें आईं। अनशन को समर्थन देने पहुंचीं महिलाओं ने पुलिस पर ज्यादती करने का आरोप लगाया।
बुद्धपार्क में सोमवार को भूपेंद्र कोरंगा का अनशन पांचवें दिन भी शांतिपूर्वक ढंग से चल रहा था। सुबह 9.30 बजे के बाद सिटी मजिस्ट्रेट गोपाल चौहान और सीओ सिटी नितिन लोहनी के नेतृत्व में पुलिस बल अनशनस्थल पहुंचा। उन्होंने भूपेंद्र को स्वास्थ्य का हवाला देते हुए अनशन से उठने के लिए कहा लेकिन कोरंगा मौके पर ही चिकित्सकों की टीम को बुलाकर परीक्षण कराने पर अड़े रहे। दोपहर 12 बजे बाद प्रशासनिक अधिकारी पुलिस फोर्स के साथ फिर बुद्धपार्क पहुंचे।
उन्होंने कोरंगा को अनशन से उठने के लिए कहा लेकिन करीब 20 मिनट तक हुई बातचीत के बावजूद निर्णय न निकलने पर पुलिस ने जबरन उन्हें उठाकर सुशीला तिवारी अस्पताल पहुंचा दिया। हालांकि स्वास्थ्य परीक्षण के बाद वे दोबारा धरनास्थल पहुंच गए। पुलिस की कार्रवाई का वहां मौजूद युवा, महिलाओं और राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों ने पुलिस का विरोध किया। प्रदर्शनकारियों की पुलिस से नोकझोंक भी हुई। धक्कामुक्की में चोटिल हुई महिलाओं ने बेस अस्पताल में मेडिकल कराया है।
भीड़ के आने का इंतजार करती रही पुलिस!
पुलिस की चूक से बुद्ध पार्क में सोमवार को बड़ा बवाल होते-होते बच गया। दरअसल सिटी मजिस्ट्रेट गोपाल चौहान और सीओ सिटी नितिन लोहनी सुबह अनशनकारी से बात करने पहुंचे थे। इस बीच चिकित्सकों की टीम भी भूपेंद्र के परीक्षण को पहुंची। जांच में पता चला कि उनके स्वास्थ्य में गिरावट आ रही है। इस पर प्रशासन की टीम ने भूपेंद्र से अस्पताल चलने का आग्रह किया लेकिन वह नहीं माने। इस पर टीम लौट गई। करीब दो घंटे बाद बुद्ध पार्क में छात्रों के साथ ही विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों का जमावड़ा लग गया। इस पर पुलिस को बल प्रयोग कर भूपेंद्र को उठाना पड़ा। सीओ नितिन लोहनी ने बताया कि सुबह हुई बातचीत के दौरान भूपेंद्र ने दो घंटे का समय मांगा और अस्पताल जाने पर हामी भरी थी। यही विश्वास पुलिस को भारी पड़ा और बुद्ध पार्क में धक्का-मुक्की हुई।
पुलिस कर्मियों ने नेम प्लेट हटाई
अनशनकारी भूपेंद्र को उठाने के दौरान बुद्धपार्क में जमकर विरोध हुआ। समर्थन में पहुंचीं महिलाओं ने वहां तैनात पुलिस कर्मियों की नेम प्लेट न होने पर सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि पुलिस नाम छिपाकर प्रदर्शनकारियों के साथ क्या करनी चाहती है। एसओ, दरोगा के साथ ही कई महिला व पुरुष पुलिस कर्मियों की नेम प्लेट नजर नहीं आई। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने शासन-प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। गौरतलब है कि पिछले दिनों छात्रसंघ चुनाव के दौरान भी पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों की वर्दी के साथ नेम प्लेट नजर नहीं आई थी।
छावनी बना बुद्ध पार्क
पुलिस प्रशासन की ओर से बुद्धपार्क में फोर्स तैनात किया गया था। कोतवाल अमर चंद्र शर्मा के साथ ही मुखानी एसओ दिनेश जोशी, काठगोदाम एसओ विमल मिश्रा, बनभूलपुरा एसओ सुशील जोशी दलबल के साथ मौके पर तैनात रहे।
पुलिस पर जबरन फोन छीनने और अभद्रता का आरोप
बुद्धपार्क में अनशन के समर्थन में पहुंचीं महिलाओं और अभिभावकों ने पुलिस पर अभद्रता का आरोप लगाते हुए पुलिस शिकायत प्राधिकरण को शिकायती पत्र सौंपा है। उनका कहना है कि पेपर लीक प्रकरण में सीबीआई जांच और परीक्षा दोबारा कराने की मांग के लिए चल रहे आंदोलन के दौरान पुलिस ने महिलाओं कपड़े फाड़े और चिंगोटी काटी। कई लोगों के पुलिस ने जबरन फोन छीन लिए। उन्होंने अभद्रता करने वाले पुलिस कर्मियों को निलंबित करने की मांग उठाई है। शिकायती पत्र में मंजू दानू, जया कर्नाटक, योगिता बनौला, सुनीता भट्ट आदि के हस्ताक्षर हैं।
तीन युवाओं ने संभाली अनशन की कमान
भूपेंद्र कोरंगा को जबरन उठाने के बाद बुद्ध पार्क में तीन युवाओं ने अनशन की कमान संभाली। सोमवार को उत्तराखंड युवा एकता मंच के संयोजक पीयूष जोशी, पहाड़ी आर्मी के संस्थापक हरीश रावत और विनोद कांडपाल ने आमरण अनशन शुरू कर दिया। इस दौरान पीयूष जोशी की मां और बहन ने भी धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलन को समर्थन दिया।अनशनकारी पीयूष जोशी ने कहा कि सुबह 9:30 बजे करीब 70-80 कर्मियों ने धरना स्थल पर पहुंचकर युवाओं और महिलाओं के साथ अभद्रता की। उन्होंने कहा कि पुलिस शिकायत प्राधिकरण स्तर पर ये मद्दा उठाया जाएगा और महिलाओं का मेडिकल परीक्षण कराया जाएगा। उन्होंने आरोप कि मुख्यमंत्री के दबाव में पुलिस टीम की ओर से बर्बरता की गई।
मुख्यमंत्री ने उनकी मांगें मान लीं है। सीबीआई जांच के लिए संस्तुति केंद्र को भेजी गई है। सीएम ने भरोसा दिलाया है कि 10 दिन बाद एसआईटी की जांच रिपोर्ट के बाद पेपर रद्द के जाने को लेकर फैसला लिया जाएगा। मंगलवार को प्रस्तावित रैली के लिए कुमाऊं भर से युवा पहुंचे हैं। - भूपेंद्र कोरंगा, अनशनकारी
सोमवार शाम को अधिकारियों के साथ बैठक हुई। मंगलवार को आंदोलन को लेकर अधिकारिक रूप से निर्णय लिया जाएगा। सभी छात्रों और अभिभावकों से सुबह 11 बजे बुद्ध पार्क पहुंचने की अपील की गई है। - पीयूष जोशी, अनशनकारी
अनशन पर बैठे भूपेंद्र कोरंगा का लगातार स्वास्थ्य बिगड़ रहा था। प्रशासन की मंशा साफ थी, जान बचाने के लिए ही उन्हें उठाना पड़ा। चिकित्सकों से जांच रिपोर्ट ओके मिलने के बाद अनशनकारी युवा को अनशन स्थल पर छोड़ दिया गया। अभी उनकी खून की जांच आना बाकी है। - गोपाल सिंह चाैहान, सिटी मजिस्ट्रेट