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Nainital News: शो पीस बन कर रह गए एक करोड़ की परियोजना के संयंत्र

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 25 Nov 2023 01:59 AM IST
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Plants worth Rs 1 crore turned into show pieces
नैनीताल। सरकारी विभागों की लापरवाही के चलते लगभग एक करोड़ रुपये की लागत से तीन साल पहले स्थापित जल गुणवत्ता आंकलन प्रणाली के अधिकांश संयत्र शो पीस बन गए हैं। जिस एलईडी स्क्रीन से नैनीझील के पानी की गुणवत्ता के आंकड़े प्रदर्शित किए जाने थे वह खराब है, अलबत्ता उसका भारी भरकम स्टेंड सामाजिक संगठनों औैर राजनैतिक दलों से जुड़े लोगों की फ्लैक्सी टांगने के काम में आ रहा है। सरकारी पैसे की यह बर्बादी जिला प्रशासन और जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाने के लिए काफी है।
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पिछले वर्षों में नैनीताल में हुए निर्माण कार्यों और सैलानियों की भारी भरकम भीड़ का असर नैनीझील की सेहत पर भी पड़ा है। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से झील प्रदूषित हुई है। इसे देखते हुए तीन साल पहले जिला प्रशासन ने नैनीझील की पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए यूनाइटेड नेशन डवलपमेंट प्रोग्राम (यूएनडीपी) की मदद से एक करोड़ रुपये की लागत से जल गुणवत्ता आंकलन प्रणाली की स्थापना की थी। इसके तहत नैनीझील में अलग-अलग स्थानों पर कई सैंसर लगाए गए थे और तल्लीताल डांठ में गांधी प्रतिमा के समीप बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाई गई थी।
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तब जिला प्रशासन ने दावा किया था कि झील में लगे सैंसर से पानी की गुणवत्ता की जांच की जाएगी और इसे एलईडी स्क्रीन से लोगों के लिए प्रदर्शित किया जाएगा। इससे यहां आने वाले सैलानियों और स्थानीय लोगों को नैनीझील के पानी की वास्तविकता का पता चल सकेगा। लोकार्पण समारोह के बाद चंद रोज तक इस स्क्रीन पर आंकड़े नजर आए लेकिन कुछ समय बाद ही यह आंकड़े भी नजर आने बंद हो गए। तब से लेकर अब तक न तो स्क्रीन ठीक कराई गई और न ही सेंसर। झील में लगाए गए सेंसर का कोई सुधलेवा नहीं है वहीं एलईडी स्क्रीन के नीचे स्टेंड अब फ्लैक्सी टांगने के काम आ रहा है।
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दावा था एसएमएस से मिलेंगे आंकड़े
नैनीताल। तीन साल पहले नैनीझील के पानी की गुणवत्ता के सतत मापन के लिए मल्लीताल पंप हाउस और तल्लीताल एरियेशन प्लांट में अलग-अलग सैंसर भी लगाए गए थे। परियोजना का लोकापर्ण कर तत्कालीन डीएम सविन बंसल ने बताया था कि झील के पानी की गुणवत्ता से संबंधित आंकड़ों को तल्लीताल डांठ में महात्मा गांधी की मूर्ति के समीप लगाई गई एलईडी स्क्रीन पर आम जनमानस के लिए प्रसारित किया जाएगा। यही नहीं तब जिला प्रशासन ने दावा किया था कि नैनीझील के पानी की गुणवत्ता के विस्तृत आंकड़े एसएमएस और एप से भी लोगों तक पहुंचाए जाएंगे। लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा। आंकड़े एलईड़ी स्क्रीन में तक नजर नहीं आए।


नैनीझील के जल से आचमन कर सकें
नैनीताल। 26 अक्तूबर 2020 को जब तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने नैनीताल में एक करोड़ रुपये की लागत की जल गुणवत्ता आंकलन प्रणाली का लोकार्पण किया था तो कहा था कि नैनीझील हमारी सांस्कृतिक विरासत का अंग है। लिहाजा सरकार चाहती है कि नैनीझील का जल इतना शुद्ध हो कि हम उससे आचमन कर सकें। नैनीझील के जल से आचमन करना तो दूर यहां तो वह उद्देश्य ही आज तक पूरा नहीं हुआ जिसके लिए एक करोड़ रुपये खर्च कर यह प्रणाली स्थापित की गई थी।



सिंचाई विभाग नैनीताल के डीडी सती सहायक अभियंता ने बताया कि नैनीझील के पानी की गुणवत्ता मापने के लिए एलईडी स्क्रीन और सैंसर आदि जिला प्रशासन ने कार्यदायी संस्था यूएनडीपी के माध्यम से लगाए थे। बाद में इसे सिंचाई विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया। वर्तमान में तल्लीताल में लगाई गई एलईडी स्क्रीन खराब है। इसे ठीक कराने के लिए यूएनडीपी से पत्राचार किया जा रहा है

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