{"_id":"60f326b98ebc3e5f0d342d30","slug":"plantation-in-kapkot-haldwani-news-hld4315373156","type":"story","status":"publish","title_hn":"नामतीचेटाबगड़, रमाड़ी समेत ऊंचाई वाले गांवों में होगी नागपुरी संतरे की पैदावार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नामतीचेटाबगड़, रमाड़ी समेत ऊंचाई वाले गांवों में होगी नागपुरी संतरे की पैदावार
विज्ञापन
बागेश्वर। कभी जिले के रमाड़ी क्षेत्र के संतरे अपने बेहतर स्वाद के कारण लोगों की पहली पसंद होते थे। रोग लगने से संतरे के पेड़ समाप्ति की कगार पर हैं।
उत्तराखंड विकेंद्रीकृत जलागम परियोजना (ग्राम्या) की पहल पर एक बार फिर रमाड़ी, नामतीचेटाबगड़ क्षेत्र में नागपुरी संतरे के पौध लगाने का काम शुरू हो गया है।
नामतीचेटाबगड़ के मूल निवासी महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के सहयोग से ग्राम्या को नागपुरी संतरे के 3500 पौधे मिले हैं। हरेला से इन पौधों का रोपण भी शुरू हो गया है।
रमाड़ी क्षेत्र को एक बार फिर संतरा उत्पादन का हब बनाने के लिए ग्राम्या ने नागपुरी संतरे के पौधे लगाने की योजना बनाई। नागपुर (महाराष्ट्र) के कृषि विश्वविद्यालय से संतरे और नीबू के पौधों के लिए संपर्क किया गया।
विज्ञापन
नागपुर कृषि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति महाराष्ट्र के राज्यपाल कोश्यारी ने भी इसमें रुचि दिखाई। राज्यपाल कोश्यारी के सहयोग से ग्राम्या को मंदारिन प्रजाति के नागपुरी संतरा के 3500 पौधों के साथ ही फूलेसरबती प्रजाति के 2500 कागजी नीबू के पौधे उपलब्ध कराए गए हैं।
ग्राम्या के उप परियोजना निदेशक ललित सिंह रावत ने बताया कि हरेले से पौधरोपण की शुरुआत हो गई है। रमाड़ी के साथ ही नामतीचेटाबगड़, नौकोड़ी, भनार, चीराबगड़, सुमगढ़, बड़ेत, सीरी और बघर में पौधे रोपे गए।
नामतीचेटाबगड़ में हुए पौधरोपण कार्यक्रम में राज्यपाल कोश्यारी के भाई जगत सिंह कोश्यारी ने भी शिरकत की। रावत ने पौध उपलब्ध कराने के लिए महाराष्ट्र के राज्यपाल का आभार जताया है। बताया है कि इलाके में माल्टा, तेजपत्ता, गर्म घाटियों में कटहल के पौधों का भी रोपण किया जा रहा है।
विज्ञापन
उत्तराखंड विकेंद्रीकृत जलागम परियोजना (ग्राम्या) की पहल पर एक बार फिर रमाड़ी, नामतीचेटाबगड़ क्षेत्र में नागपुरी संतरे के पौध लगाने का काम शुरू हो गया है।
नामतीचेटाबगड़ के मूल निवासी महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के सहयोग से ग्राम्या को नागपुरी संतरे के 3500 पौधे मिले हैं। हरेला से इन पौधों का रोपण भी शुरू हो गया है।
विज्ञापन
रमाड़ी क्षेत्र को एक बार फिर संतरा उत्पादन का हब बनाने के लिए ग्राम्या ने नागपुरी संतरे के पौधे लगाने की योजना बनाई। नागपुर (महाराष्ट्र) के कृषि विश्वविद्यालय से संतरे और नीबू के पौधों के लिए संपर्क किया गया।
विज्ञापन
नागपुर कृषि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति महाराष्ट्र के राज्यपाल कोश्यारी ने भी इसमें रुचि दिखाई। राज्यपाल कोश्यारी के सहयोग से ग्राम्या को मंदारिन प्रजाति के नागपुरी संतरा के 3500 पौधों के साथ ही फूलेसरबती प्रजाति के 2500 कागजी नीबू के पौधे उपलब्ध कराए गए हैं।
ग्राम्या के उप परियोजना निदेशक ललित सिंह रावत ने बताया कि हरेले से पौधरोपण की शुरुआत हो गई है। रमाड़ी के साथ ही नामतीचेटाबगड़, नौकोड़ी, भनार, चीराबगड़, सुमगढ़, बड़ेत, सीरी और बघर में पौधे रोपे गए।
नामतीचेटाबगड़ में हुए पौधरोपण कार्यक्रम में राज्यपाल कोश्यारी के भाई जगत सिंह कोश्यारी ने भी शिरकत की। रावत ने पौध उपलब्ध कराने के लिए महाराष्ट्र के राज्यपाल का आभार जताया है। बताया है कि इलाके में माल्टा, तेजपत्ता, गर्म घाटियों में कटहल के पौधों का भी रोपण किया जा रहा है।