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Uttarakhand: एप से खरीदेंगे पिरूल...खाते में ऑनलाइन जाएगी रकम, जंगल को आग से बचाने के लिए बनी योजना
Wed, 15 May 2024 10:43 AM IST
हीरा मेहरा
विजेंद्र श्रीवास्तव
विजेंद्र श्रीवास्तव
Published by: हीरा मेहरा
Updated Wed, 15 May 2024 10:43 AM IST
सार
प्रदेश में वनाग्नि का एक कारण पिरूल रहा है, अब इस पिरूल को जंगल से हटाने के साथ स्थानीय लोगों को आय बढ़ाने की योजना बनाई गई है। इसके तहत पीसीबी 50 रुपये प्रति किलो पिरूल खरीदने की योजना बनाई है, अब इस योजना में एप मददगार बनेगा।
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जंगल में आग
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
प्रदेश में वनाग्नि का एक कारण पिरूल रहा है, अब इस पिरूल को जंगल से हटाने के साथ स्थानीय लोगों को आय बढ़ाने की योजना बनाई गई है। इसके तहत पीसीबी 50 रुपये प्रति किलो पिरूल खरीदने की योजना बनाई है, अब इस योजना में एप मददगार बनेगा। इस एप के माध्यम से पिरूल की खरीद समेत अन्य प्रक्रियाओं को पूरा किया जाएगा। पिरूल बेचने वाले के खाते में 24 घंटे में ऑनलाइन रकम पहुंच जाएगी।
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प्रदेश में वनाग्नि की घटनाओं ने चिंता में डाल दिया था, कुछ दिन पूर्व तक जंगल धधक रहे थे। बरसात के बाद आग काबू हो सकी। जंगल में आग एक बड़ा कारण चीड़ की पत्ती पिरूल को माना जाता है। राज्य में जंगलात की 244 रेंज है, इसमें 137 रेंज में पिरूल गिरता है, जंगल में करीब 24 लाख टन तक पिरूल होता है। पिरूल से निपटने की कोशिश हुई, लेकिन व्यापक स्तर पर सफल नहीं हुई है। अब इससे निपटने के लिए पचास रुपये प्रति किलो तक पिरूल खरीदने की तैयारी है, यह खरीद पीसीबी करेगा।
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प्रक्रिया में एप बनेगा मददगार
पीसीबी के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते कहते हैं कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर योजना को तैयार किया जा रहा है। इसमें पीसीबी पिरूल को खरीदने की योजना के नियम और शर्तों को तैयार कर रहा है। इस योजना एप का इस्तेमाल होगा। पिरूल को खरीद कर निकट के रेंज कार्यालय लेकर पहुंचेंगे। यहां पर एक गोदाम बनाया जाएगा। रेंज कार्यालय में पिरूल की तौल होगी। उसके माध्यम से तैयार किए जाने वाले एप में पिरूल विक्रेता के नाम, बैंक खाता संख्या, आधार की सूचना समेत अन्य डिटेल को भरा जाएगा। इसमें फोटोग्राफ भी अपलोड होगा। एप में सूचना भरने के बाद डिटेल पीसीबी के पास पहुंचेगी। फिर उसका सत्यापन किया जाएगा। फिर पिरूल की मात्रा के हिसाब से संबंधित विक्रेता के खाते में 24 घंटे में राशि पहुंच जाएगी। इससे पारदर्शिता भी रहेगी। एप को तैयार करने का काम चल रहा है।
पर्यावरण के लिए भी फायदा लोगों की आय का विकल्प भी
प्रदेश में नवंबर-2023 से 14 अप्रैल तक 1065 जंगल की आग की घटना हुई, इसमें 1439 हेक्टेयर में वन संपदा को नुकसान पहुंचा। जंगल की आग से पर्यावरण को काफी नुकसान हुआ है। डॉ धकाते कहते हैं कि अगर जंगल की आग कम होती है तो इससे पर्यावरण को भी लाभ होगा। इसके अलावा पिरूल की बिक्री से लोगों के पास आय का एक विकल्प बढ़ेगा। आर्थिक मजबूती में यह फायदे मंद साबित होगी।