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संरक्षित किया जाना चाहिए काकड़ीघाट का पीपल का वृक्ष
ब्यूरो/अमर उजाला, नैनीताल
Updated Fri, 23 Jan 2015 01:49 AM IST
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पंतनगर कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एचएस धामी ने दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में बोधि वृक्ष की तरह ही काकड़ीघाट (नैनीताल) के पीपल के वृक्ष को भी धरोहर के रूप में संरक्षित करने का मुद्दा उठाया।
प्रो. धामी ने कहा कि बोधि वृक्ष की ही तरह काकड़ीघाट का पीपल का वृक्ष भी एतिहासिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण है। इसी वृक्ष के नीचे बैठकर स्वामी विवेकानंद ने ज्ञान प्राप्त किया था।
दिल्ली में विभिन्न विश्वविद्यालयों और संस्थानों के वैज्ञानिकों की उच्चस्तरीय बैठक से लौटे प्रो. धामी ने पत्रकारों को बताया कि दिल्ली में उन्होंने काकड़ीघाट के पीपल के वृक्ष का ऐतिहासिक महत्व बताते हुए कहा कि इसी वृक्ष के नीचे बैठकर स्वामी विवेकानंद ने ज्ञान प्राप्त किया था। यह वृक्ष अब सूखने की कगार पर है। इसे धरोहर के रूप में संरक्षित करने की जरूरत है। इसके अलावा उन्होंने लगातार गिरते जा रहे कोसी के जल स्तर को रिचार्ज करने के लिए भी नई तकनीक की जरूरत है।
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उन्होंने बताया कि उनके मुद्दे को सभी ने सराहा और इसके लिए कार्ययोजना बनाने और इस पर अध्ययन करने का प्रस्ताव पारित किया।
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प्रो. धामी ने कहा कि बोधि वृक्ष की ही तरह काकड़ीघाट का पीपल का वृक्ष भी एतिहासिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण है। इसी वृक्ष के नीचे बैठकर स्वामी विवेकानंद ने ज्ञान प्राप्त किया था।
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दिल्ली में विभिन्न विश्वविद्यालयों और संस्थानों के वैज्ञानिकों की उच्चस्तरीय बैठक से लौटे प्रो. धामी ने पत्रकारों को बताया कि दिल्ली में उन्होंने काकड़ीघाट के पीपल के वृक्ष का ऐतिहासिक महत्व बताते हुए कहा कि इसी वृक्ष के नीचे बैठकर स्वामी विवेकानंद ने ज्ञान प्राप्त किया था। यह वृक्ष अब सूखने की कगार पर है। इसे धरोहर के रूप में संरक्षित करने की जरूरत है। इसके अलावा उन्होंने लगातार गिरते जा रहे कोसी के जल स्तर को रिचार्ज करने के लिए भी नई तकनीक की जरूरत है।
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उन्होंने बताया कि उनके मुद्दे को सभी ने सराहा और इसके लिए कार्ययोजना बनाने और इस पर अध्ययन करने का प्रस्ताव पारित किया।