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डेढ़ इंच ऊपर नाटक ने बटोरी वाहवाही
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नैनीताल के शैले हाल में डेढ़ इंच ऊपर नाटक का मंचन करते कलाकार। संवाद
- फोटो : NAINITAL
नैनीताल। अनुकृति रंगमंडल कानपुर, युगमंच और मधुबन आर्ट्स की संयुक्त पहल पर शैले हॉल में आयोजित नाट्य समारोह में शुक्रवार को एकल नाटक ‘डेढ़ इंच ऊपर’ और ‘मैं नर्क से बोल रहा हूं’ ने दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी। सड़क बन रही है.. नाटक को भी पसंद किया गया। हास्य, व्यंग समेत समाज की ज्वलंत समस्याओं को जीवंत करते नाटकों को दर्शकों ने काफी पसंद किया।
कार्यक्रम की शुरुआत निर्मल वर्मा के नाटक डेढ़ इंच ऊपर से हुई। केपी साह के निर्देशन में हुए नाटक में डॉ. मोहित सनवाल ने एकल अभिनय किया। कहानी द्वितीय विश्व युद्ध की विभीषिका को दर्शाती है। इसमें हिटलर की गेस्टापो पुलिस की बर्बरता और आम जन में व्याप्त भय को दर्शाया गया।
युगमंच नैनीताल की प्रस्तुति मैं नरक से बोल रहा हूं को भी लोगों ने पसंद किया। लेखक हरिशंकर परसाई की रचना पर आधारित नाटक में संदेश दिया गया कि तुम्हें जिंदा आदमी की बात सुनने की आदत नहीं इसलिए मैं मर कर बोल रहा हूं। इसमें व्यक्ति के मरने के बाद उसका श्राद्ध तर्पण, कब्र पर चिराग जलाने आदि को दर्शाया गया है। जीते जी उस मनुष्य को चुल्लू भर पानी भी नहीं दिया गया। नाटक में कुत्ते की वफादारी की तुलना मनुष्य की मतलब परस्ती जैसे व्यंग के साथ नवीन बेगाना ने यादगार अभिनय किया। सड़क बन रही है.. नाटक में मनोज कुमार की भी सराहना की गई। इसमें ‘सड़क कौन बना रहा है, क्यों बना रहा है अभी तो इलेक्शन के काफी दिन है’ के व्यंग से मौकापरस्ती और अवसर भुनाने जैसे मुद्दों को केंद्रित करते हुए अभिनय किया गया।
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इस मौके पर अनुकृति कानपुर के सचिव वरिष्ठ रंगकर्मी डॉ. ओमेंद्र कुमार, जहूर आलम, डॉ. मोहित सनवाल, मनोज कुमार, नवीन बेगाना, सविता नागर, राजेश अमरोही, उमेश तिवारी, राजेश शाह आदि मौजूद रहे।
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कार्यक्रम की शुरुआत निर्मल वर्मा के नाटक डेढ़ इंच ऊपर से हुई। केपी साह के निर्देशन में हुए नाटक में डॉ. मोहित सनवाल ने एकल अभिनय किया। कहानी द्वितीय विश्व युद्ध की विभीषिका को दर्शाती है। इसमें हिटलर की गेस्टापो पुलिस की बर्बरता और आम जन में व्याप्त भय को दर्शाया गया।
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युगमंच नैनीताल की प्रस्तुति मैं नरक से बोल रहा हूं को भी लोगों ने पसंद किया। लेखक हरिशंकर परसाई की रचना पर आधारित नाटक में संदेश दिया गया कि तुम्हें जिंदा आदमी की बात सुनने की आदत नहीं इसलिए मैं मर कर बोल रहा हूं। इसमें व्यक्ति के मरने के बाद उसका श्राद्ध तर्पण, कब्र पर चिराग जलाने आदि को दर्शाया गया है। जीते जी उस मनुष्य को चुल्लू भर पानी भी नहीं दिया गया। नाटक में कुत्ते की वफादारी की तुलना मनुष्य की मतलब परस्ती जैसे व्यंग के साथ नवीन बेगाना ने यादगार अभिनय किया। सड़क बन रही है.. नाटक में मनोज कुमार की भी सराहना की गई। इसमें ‘सड़क कौन बना रहा है, क्यों बना रहा है अभी तो इलेक्शन के काफी दिन है’ के व्यंग से मौकापरस्ती और अवसर भुनाने जैसे मुद्दों को केंद्रित करते हुए अभिनय किया गया।
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इस मौके पर अनुकृति कानपुर के सचिव वरिष्ठ रंगकर्मी डॉ. ओमेंद्र कुमार, जहूर आलम, डॉ. मोहित सनवाल, मनोज कुमार, नवीन बेगाना, सविता नागर, राजेश अमरोही, उमेश तिवारी, राजेश शाह आदि मौजूद रहे।