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अब स्वीडन, लंदन से मिल रहे आर्डर
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हल्द्वानी में ग्रोथ सेंटर चला रही महिलाओं के हाथों से बने उत्पाद। विज्ञप्ति
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हल्द्वानी। महिलाओं का हौसला और उनके ऊंची उड़ान भरने के सपने केवल सपने नहीं हैं। वे इन सपनों को हकीकत में बदल रहीं हैं। ग्रोथ सेंटर चलाने वालीं कुछ महिलाओं ने सालभर में 10 लाख का कारोबार किया है। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री तक पहुंचने के बाद अब उनके उत्पादों की धमक स्वीडन और लंदन तक जा पहुंची है और वहां से ऑर्डर भी आने लगे हैं।
एक अप्रैल 2021 को हल्द्वानी उद्योग विभाग परिसर में नयना देवी ग्रोथ सेंटर खोला गया था। इसमें महिलाएं ही प्रशिक्षक और संचालक हैं। 40 महिलाओं की टीम ने 50 रुपये से लेकर 500 रुपये तक के उत्पादों को बनाना शुरू किया। उत्पादों की क्वालिटी अच्छी होने के बाद उद्योग विभाग और डीएम धीराज गर्ब्याल की मदद से महिलाओं के हाथों से बनाए गए उत्पाद ऑफिसों में, संस्थानों में जाने लगे।
उद्योग केंद्र के प्रबंधक सुनील कुमार पंत बताते हैं कि ग्रोथ सेंटर की कोऑपरेटिव सोसायटी बनी है। बाकायदा बायलॉज भी तैयार किया गया है। महिलाएं इको फ्रेंडली उत्पाद तैयार कर रहीं हैं। उद्योग विभाग इस पूरे काम की मॉनिटरिंग कर रहा है। इन उत्पादों की विदेशों में भी मांग हो रही है। लंदन से दो और स्वीडन से तीन ऑर्डर मिल चुके हैं जिनमें जूट बैग, लेडीज पर्स और ऐपण पेंटिंग शामिल हैं।
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एक दिन में 40-50 बैग बना लेतीं हैं
जूट और ऐपण कलाकृति के जरिये महिलाओं ने पानी की बोतल, फोन बैग, ऐपण बैग, कैरी बैग, टिफिन बैग, सब्जी बैग, पर्स तैयार किए हैं। महिलाएं एक दिन में 40 से 50 बैग तैयार कर लेतीं हैं। इसमें कुछ महिलाएं ऐपण पेंटिंग तो कुछ जूट बैग और अन्य सामान तैयार करतीं हैं।
एक आइटम में होती से 30 से 40 रुपये की बचत
एक सामान्य साइज का जूट बैग तैयार करने में दो घंटे लगते हैं। फैंसी लुक वाला बैग तीन घंटे में तैयार होता है। लेडीज पर्स एक से डेढ़ घंटे में और ऐपण पेंटिंग, फोटो फ्रेम, वॉल फ्रेम तीन घंटे में तैयार होता है। सेंटर सचिव और मास्टर ट्रेनर रुचि नैनवाल बतातीं हैं कि अभी शुरुआत है इसलिए एक आइटम में 30 से 40 रुपये की बचत हो जाती है। सामान्यत: एक जूट बैग 180 रुपये में बिकता है। जूट बाहर से मंगवाना पड़ता है जबकि डिजायन सामग्री स्थानीय स्तर पर मिल जाती है।
कोट
ग्रोथ सेंटर अच्छा काम कर रहा है। महिलाओं के हाथों से बने उत्पाद राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गवर्नर के हाथों में जा चुके हैं। राज्यभर में वीवीआईपी कार्यक्रमों में ये उत्पाद जा रहे हैं। इसके अलावा प्रवासी भारतीयों की ओर से भी डिमांड आई है। - विपिन कुमार, महाप्रबंधक उद्योग नैनीताल।
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एक अप्रैल 2021 को हल्द्वानी उद्योग विभाग परिसर में नयना देवी ग्रोथ सेंटर खोला गया था। इसमें महिलाएं ही प्रशिक्षक और संचालक हैं। 40 महिलाओं की टीम ने 50 रुपये से लेकर 500 रुपये तक के उत्पादों को बनाना शुरू किया। उत्पादों की क्वालिटी अच्छी होने के बाद उद्योग विभाग और डीएम धीराज गर्ब्याल की मदद से महिलाओं के हाथों से बनाए गए उत्पाद ऑफिसों में, संस्थानों में जाने लगे।
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उद्योग केंद्र के प्रबंधक सुनील कुमार पंत बताते हैं कि ग्रोथ सेंटर की कोऑपरेटिव सोसायटी बनी है। बाकायदा बायलॉज भी तैयार किया गया है। महिलाएं इको फ्रेंडली उत्पाद तैयार कर रहीं हैं। उद्योग विभाग इस पूरे काम की मॉनिटरिंग कर रहा है। इन उत्पादों की विदेशों में भी मांग हो रही है। लंदन से दो और स्वीडन से तीन ऑर्डर मिल चुके हैं जिनमें जूट बैग, लेडीज पर्स और ऐपण पेंटिंग शामिल हैं।
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एक दिन में 40-50 बैग बना लेतीं हैं
जूट और ऐपण कलाकृति के जरिये महिलाओं ने पानी की बोतल, फोन बैग, ऐपण बैग, कैरी बैग, टिफिन बैग, सब्जी बैग, पर्स तैयार किए हैं। महिलाएं एक दिन में 40 से 50 बैग तैयार कर लेतीं हैं। इसमें कुछ महिलाएं ऐपण पेंटिंग तो कुछ जूट बैग और अन्य सामान तैयार करतीं हैं।
एक आइटम में होती से 30 से 40 रुपये की बचत
एक सामान्य साइज का जूट बैग तैयार करने में दो घंटे लगते हैं। फैंसी लुक वाला बैग तीन घंटे में तैयार होता है। लेडीज पर्स एक से डेढ़ घंटे में और ऐपण पेंटिंग, फोटो फ्रेम, वॉल फ्रेम तीन घंटे में तैयार होता है। सेंटर सचिव और मास्टर ट्रेनर रुचि नैनवाल बतातीं हैं कि अभी शुरुआत है इसलिए एक आइटम में 30 से 40 रुपये की बचत हो जाती है। सामान्यत: एक जूट बैग 180 रुपये में बिकता है। जूट बाहर से मंगवाना पड़ता है जबकि डिजायन सामग्री स्थानीय स्तर पर मिल जाती है।
कोट
ग्रोथ सेंटर अच्छा काम कर रहा है। महिलाओं के हाथों से बने उत्पाद राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गवर्नर के हाथों में जा चुके हैं। राज्यभर में वीवीआईपी कार्यक्रमों में ये उत्पाद जा रहे हैं। इसके अलावा प्रवासी भारतीयों की ओर से भी डिमांड आई है। - विपिन कुमार, महाप्रबंधक उद्योग नैनीताल।