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‘दो-तीन हजार नहीं, सामान कार्य, सामान वेतन दो’
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हल्द्वानी। दो से तीन हजार रुपये मानदेय बढ़ाने और हर साल मानदेय वृद्धि के कैबिनेट के फैसले से उपनल कर्मचारी खुश नहीं हैं। उन्होंने सरकार से हाईकोर्ट के आदेशों का पालन करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका को वापस लेने की मांग की है।
उपनल कर्मचारियों ने कहा कि हाईकोर्ट ने समान कार्य, समान वेतन देने का निर्णय दिया था। साथ ही सरकार से एक वर्ष में नियमावली बनाकर उपनल कर्मचारियों को स्थायी करने के लिए भी कहा था लेकिन सरकार इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चले गई। उपनल कर्मियों ने कहा कि महंगाई चरम पर पहुंच गई है। ऐसे में दो से तीन हजार रुपये बढ़ाना सिर्फ चुनावी झुनझुना है।
उपनल संविदा कर्मचारी संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष पूरन चंद्र भट्ट का कहना है कि हमारी लड़ाई उपनल संविदा कर्मचारियों को नियमित करने की है। सभी कर्मचारी 17 वर्षों से कार्यरत हैं। सरकार हमें 10 से 20 प्रतिशत मानदेय बढ़ाकर इसका श्रेय लेना चाहती है।
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प्रदेश सलाहकार मनोज जोशी का कहना है कि उपनल कर्मचारियों का प्रमुख मुद्दा है कि सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में लगाई गई एसएलपी वापस हो और हाईकोर्ट के आदेशों का पालन हो।
प्रदेश अध्यक्ष रमेश शर्मा का कहना है कि चुनाव को देखते हुए सरकार उपनल कर्मचारियों को झुनझुना देना चाहती है। हम सामान कार्य, सामान वेतन और स्थायीकरण के मुद्दे को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। मांगें नहीं माने जाने तक आंदोलन जारी रहेगा।
एसटीएच उपनल कर्मियों ने भी मानदेय वृद्धि का विरोध किया
हल्द्वानी। उपनल कर्मचारी समिति डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय मेडिकल कालेज के बैनर तले एसटीएच मेडिकल कॉलेज के उपनल कर्मियों की हड़ताल जारी है। कर्मचारियों ने बुद्ध पार्क में धरना दिया। कर्मचारियों ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी करना छलावा है जिसे सभी कर्मचारियों ने ठुकरा दिया है। कहा कि अब आंदोलन और उग्र रूप धारण करेगा। इस दौरान पीएस बोरा, उमा डांगी, राकेश कुमार, मनीष तिवारी, महेश कुमार, प्रेमा ओली, नेत्रपाल, महेश कुमार आदि मौजूद थे।
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उपनल कर्मचारियों ने कहा कि हाईकोर्ट ने समान कार्य, समान वेतन देने का निर्णय दिया था। साथ ही सरकार से एक वर्ष में नियमावली बनाकर उपनल कर्मचारियों को स्थायी करने के लिए भी कहा था लेकिन सरकार इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चले गई। उपनल कर्मियों ने कहा कि महंगाई चरम पर पहुंच गई है। ऐसे में दो से तीन हजार रुपये बढ़ाना सिर्फ चुनावी झुनझुना है।
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उपनल संविदा कर्मचारी संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष पूरन चंद्र भट्ट का कहना है कि हमारी लड़ाई उपनल संविदा कर्मचारियों को नियमित करने की है। सभी कर्मचारी 17 वर्षों से कार्यरत हैं। सरकार हमें 10 से 20 प्रतिशत मानदेय बढ़ाकर इसका श्रेय लेना चाहती है।
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प्रदेश सलाहकार मनोज जोशी का कहना है कि उपनल कर्मचारियों का प्रमुख मुद्दा है कि सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में लगाई गई एसएलपी वापस हो और हाईकोर्ट के आदेशों का पालन हो।
प्रदेश अध्यक्ष रमेश शर्मा का कहना है कि चुनाव को देखते हुए सरकार उपनल कर्मचारियों को झुनझुना देना चाहती है। हम सामान कार्य, सामान वेतन और स्थायीकरण के मुद्दे को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। मांगें नहीं माने जाने तक आंदोलन जारी रहेगा।
एसटीएच उपनल कर्मियों ने भी मानदेय वृद्धि का विरोध किया
हल्द्वानी। उपनल कर्मचारी समिति डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय मेडिकल कालेज के बैनर तले एसटीएच मेडिकल कॉलेज के उपनल कर्मियों की हड़ताल जारी है। कर्मचारियों ने बुद्ध पार्क में धरना दिया। कर्मचारियों ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी करना छलावा है जिसे सभी कर्मचारियों ने ठुकरा दिया है। कहा कि अब आंदोलन और उग्र रूप धारण करेगा। इस दौरान पीएस बोरा, उमा डांगी, राकेश कुमार, मनीष तिवारी, महेश कुमार, प्रेमा ओली, नेत्रपाल, महेश कुमार आदि मौजूद थे।