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रेनू दी अब कहां को जाएं...

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 18 Sep 2019 11:51 PM IST
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No Road How To Go
पिथौरागढ़ के नाचनी में पिछले दिनों आई आपदा के बाद रास्ते बह गए। ऐसे में नाचनी के कोट्यूड़ा में स्? - फोटो : PITHORAGARH
रेनू दी अब कहां को जाएं...
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आपदा के 13 दिन बाद भी नहीं बने रास्ते, जान जोखिम में डालकर बच्चे जा रहे स्कूल
गांव में वायरल बुखार से कई लोग बीमार, अस्पताल जाने का रास्ता नहीं होने से लाचार
अमर उजाला ब्यूरो
नाचनी/पिथौरागढ़। ‘रेनू दी अब कहां को जाए...? यह ऐसा सवाल है, जिसका जवाब कक्षा आठ में पढ़ने वाली रेनू तो दूर गांव के बड़े और बुजुर्गों के पास भी नहीं है। दरअसल नाचनी क्षेत्र में बादल फटने की घटना को 13 दिन बीत चुके हैं, लेकिन कई गांवों में पैदल चलने लायक रास्तों का पुनर्निर्माण तक सरकारी तंत्र नहीं करा सका है। रास्ते नहीं होने से जान जोखिम में डालकर गांव के बच्चे जहां स्कूल जाने को मजबूर हैं, वहीं वायरल बुखार से पीड़ित लोग गांव में कैद होकर रह गए हैं। नाचनी क्षेत्र के गोकुलधूरा, कोट्यूड़ा में हालात बेहद विकट हैं।
छह सितंबर की रात बादल फटने से गोकुलधूरा, कोट्यूड़ा में पैदल चलने लायक भी रास्ते नहीं बचे हैं। इसके चलते गांव आने और जाने वाले लोग परेशान हैं। बुधवार को गोकुलधूरा से कोट्यूड़ा और हुपुली स्कूल जा रहे निशा (कक्षा 4), राहुल (कक्षा 6) और रेनू (कक्षा 8) कोट्यूड़ा में जंगल रौली के पास एक चट्टान के पास खड़े थे। तीनों यही सोच रहे थे आगे कैसे जाया जाए क्योंकि जहां कभी रास्ता था, वहां अब खाई है। बच्चे असमंजस में थे कि इस खाई को पार कैसे किया जाए। राहुल और निशा रेनू से पूछ ही बैठे... दीदी अब कहां जाएं? रेनू को भी कुछ सूझ नहीं रहा था। इसी बीच वहां से गुजर रहे निवर्तमान क्षेत्र पंचायत सदस्य जगदीश बथियाल ने बच्चों का मार्गदर्शन किया। सबसे पहले निशा, राहुल और बाद में रेनू ने खुद खाई पार की।
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निवर्तमान क्षेत्र पंचायत सदस्य जगदीश बथियाल ने बताया कि गोकुलधूरा से कोट्यूड़ा तीन किलोमीटर और हुपुली 6 किलोमीटर दूर है। गांव के लोग तो परेशानी झेल ही रहे हैं। स्कूली बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है। ऐहतियातन अभिभावकों को आवागमन के समय बच्चों की निगरानी करनी पड़ रही है। इसके बावजूद हादसे की आशंका बनी रहती है। ज्यादातर गांव वालों के पशु भी माइग्रेसन में गोकुलधुरा में फंसे हैं। जहां ग्रामीणों को रोज चारा लेकर जाना पड़ रहा है। बताया कि कोट्यूडा से 15 बच्चे पढ़ने के लिए नाचनी जाते हैं, जहां के हालात भी ऐसे ही हैं। गांव में वायरल बुखार फैला है। कई लोग बीमार हैं। पर अस्पताल जाने का कोई माध्यम नहीं है।
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एसडीएम को रास्तों की वैकल्पिक व्यवस्था के लिए निर्देशित किया जा रहा है। आपदा मद से रकम मिलने तक रास्तों की वैकल्पिक तौर पर मरम्मत कराई जाएगी। रास्ते आवागमन लायक बनाए जाएंगे।

डॉ. वीके जोगदंडे डीएम पिथौरागढ़
खेल मैदान बन गया तालाब
नाचनी। छह सितंबर की अतिवृष्टि के बाद से राजकीय इंटर कॉलेज नाचनी का खेल मैदान तालाब बना हुआ है। इन दिनों विद्यालय में सीनियर डिवीजन के 53 और जूनियर डिवीजन के 63 एनसीसी कैडेट प्रशिक्षण ले रहे हैं। इन लोगों को तालाब के किनारे प्रशिक्षण लेना पड़ रहा है। पिछले दिनों इस अव्यवस्था के कारण प्रशिक्षण भी बाधित रहा। प्रधानाचार्य जीआर आर्या ने बताया कि पानी की निकासी की कोई व्यवस्था न होने से यह दिक्कत आई है। अभिभावक संघ के अध्यक्ष मोहशन गिरी ने बताया कि आपदा मद से चहारदीवारी और पानी निकासी का कार्य कराने केलिए प्रशासन को पत्र भेजा है।

पिथौरागढ़ के नाचनी में पिछले दिनों आई आपदा के बाद रास्ते बह गए। ऐसे में नाचनी के कोट्यूड़ा में स्?

पिथौरागढ़ के नाचनी में पिछले दिनों आई आपदा के बाद रास्ते बह गए। ऐसे में नाचनी के कोट्यूड़ा में स्?- फोटो : PITHORAGARH

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