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चमगादड़ ही नहीं बचे, मच्छर कैसे खत्म होंगे

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 24 Sep 2019 01:42 AM IST
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No bats left, how mosquitoes will end
हल्‍द्वानी मेडिकल चौकी के पास कभी इस तरहां से होता था चमगादड़ो का वास। अमर उजाला
धन सिंह बिष्ट
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हल्द्वानी। मच्छर जनित रोग डेंगू की चपेट में आकर सैकड़ों लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। कई जान गंवा चुके हैं। क्या आपको पता है कि अपने सबसे बड़े दुश्मन चमगादड़ के विलुप्त होने के कारण मच्छर खत्म नहीं हो पा रहे हैं। वन्य जीव विशेषज्ञों के अनुसार अपनी ग्रंथी में पाये जाने वाले इकोलोकेशन सिस्टम से चमगादड़ मच्छरों का शिकार करते हैं लेकिन चमगादड़ों की संख्या लगातार कम होने से मच्छरों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण करना चुुनौतीपूर्ण हो गया है।
हर साल देश में कहीं न कहीं मच्छरों के काटने से सामान्य मलेरिया, मेनेंजाइटिस, चिकनगुनिया, जापानी एंसेफ्लाइटिस, वायरल एंसेफ्लाइटस और डेंगू जैसे घातक रोग का कहर रहता है। मच्छरों से बचाव के लिए कई तरह के उपाय किये जाते हैं लेकिन मच्छरों का खात्मा नहीं हो पाता। चमगादड़ को मच्छर का सबसे बड़ा दुश्मन माना जाता है। वन्य जीव विशेषज्ञों के अनुसार चमगादड़ों में प्रतिध्वनि के आधार पर काम करने वाली इकोलोकेशन तकनीक होती है।
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एक तरह की रडार प्रणाली के तहत काम करने वाली इस तकनीक से चमगादड़ मच्छरों की जगह पता करने के बाद उनका शिकार करता है। चमगादड़ों की कुछ प्रजातियां एक घंटे में ढाई से तीन हजार मच्छरों का शिकार करती हैं और चमगादड़ों का एक झुंड एक रात में करीब 150 टन से अधिक मच्छरों को नष्ट कर देता है। हल्द्वानी के टीपीनगर, शीशमहल, गौलापार और डहरिया क्षेत्र में चमगादड़ों का वास स्थान था लेकिन समय के साथ चमगादड़ों की तादाद घटती रही और मच्छरों की संख्या बढ़ने लगी।
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विदेशों में संरक्षित किये जा रहे चमगादड़
हल्द्वानी। मच्छरों का शिकारी होने के साथ ही चमगादड़ों को पर्यावरण संरक्षण के लिए भी उपयोगी माना जाता है। चमगादड़ों की वजह से ही 15 फीसदी वर्षा वन का संरक्षण होता है और फल खाने वाले चमगादड़ों के कारण ही जंगल में फूलों के पराग कण तेजी से अन्य स्थानों पर पहुंचते हैं। इन्हीं विशेषताओं के कारण ब्रिटेन और अमरीका में वैट हाउस बनाकर चमगादड़ों का संरक्षण किया जा रहा है। भारत के बंगाल में भी ग्रामीण क्षेत्रों में इनको संरक्षित करने की शुरूआत हुई है।

कोट
चमगादड़ मच्छरों के सबसे बड़े शिकारी हैं। पूर्व में हल्द्वानी में कई स्थानों पर चमगादड़ों का वास था लेकिन वर्तमान में वास स्थल लगभग खत्म हो गए हैं जिससे चमगादड़ विलुप्त होने की कगार पर हैं। चमगादड़ों के कम होने से मच्छरों की संख्या को कम करना बेहद चुनौतीपूर्ण है।
-डॉ. पराग मधुकर धकाते वन संरक्षक पश्चिमी वृत्त।
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