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एनडी के साथ हड़ताली उपनल कर्मियों का दून कूच 

Thu, 15 Dec 2016 11:23 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो हल्द्वानी
अमर उजाला ब्यूरो हल्द्वानी Updated Thu, 15 Dec 2016 11:23 PM IST
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ND Dunn traveled with striking workers Upanl
परिवार के साथ एनडी - फोटो : अमर उजाला

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 हड़ताली उपनल कर्मचारी दो सूत्रीय मांगों को पूरी करवाने के लिए बृहस्पतिवार को पूर्व सीएम एनडी तिवारी के साथ देहरादून रवाना हो गए। इससे पूर्व हड़ताली कर्मियों ने संविदा कर्मी बनाए जाने के लिए सरकार द्वारा आठ वर्ष की लगाई गई बाध्यता के विरोध में नारेबाजी कर जोरदार प्रदर्शन भी किया। 
उपनल कर्मचारी विभागीय संविदा एवं हटाए गए कर्मचारियों की बहाली की मांग को लेकर 24 दिनों से हड़ताल पर हैं। उपनल कर्मचारियों ने सरकार द्वारा संविदा कर्मी बनाने के लिए आठ वर्ष होने की अनिवार्यता करने को लेकर रोष जाहिर किया। बुद्ध पार्क में चल रहे धरनास्थल पर वक्ताओं ने कहा कि सरकार ने जो आठ वर्ष के मानक बनाए हैं, उससे कोई भी उपनल कर्मचारी लाभान्वित नहीं हो रहा है। उनका कहना था कि भले ही उपनल में कार्य करते हुए कर्मचारियों को छह वर्ष हुए हैं, लेकिन इससे पहले उन्हीं विभागों में अन्य आउटसोर्स एजेंसियों द्वारा कार्य करते हुए उन्हें 15 से अधिक वर्ष हो गए हैं। कहा कि सरकार के इस फैसले का जब किसी कर्मचारी को कोई लाभ ही नहीं मिल पाएगा तो इसका फायदा क्या, इससे तो हजारों कर्मचारियों का भविष्य ही अंधकार मय हो जाएगा। इधर, दोपहर को पूर्व सीएम एनडी तिवारी अपने पुत्र रोहित शेखर और पत्नी उज्ज्वला तिवारी के साथ धरनास्थल पर पहुंचे। हड़ताली कर्मचारियों ने पूर्व सीएम के जिंदाबाद के नारे लगाकर उनका स्वागत किया। इसके बाद पूर्व सीएम के नेतृत्व हड़ताली कर्मचारी बसों में सवार होकर देहरादून के लिए कूच कर गए। इस दौरान उपनल कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष नीरज हैड़िया, महामंत्री राधे श्याम, पूरन भट्ट, पान सिंह बिष्ट, मोना पपोला, हेमचंद्र पनेरु, सतीश भट्ट, तेजा बिष्ट, मोहन पंत आदि थे। 
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छोटे कर्मचारियों की लिखित परीक्षा पर उठाए सवाल 
हल्द्वानी। हड़ताली कर्मचारियों ने छोटे कर्मचारियों को नियमित करने के लिए सरकार द्वारा लिखित परीक्षा की अनिवार्यता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उच्चशिक्षा विभाग में संविदा पर कार्यरत बड़ी संख्या में प्राध्यापकों का विनियमितीकरण किया गया, लेकिन उनकी कोई लिखित परीक्षा नहीं ली गई और उन्हें सीधे ही नियमित कर दिया गया। जब छोटे कर्मचारियों का नंबर आया तो उनके लिए लिखित परीक्षा रख दी गई जो कि न्यायोचित नहीं है।  
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