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इतिहास वर्तमान में भी प्रासंगिक
ब्यूरो/अमर उजाला, रामनगर
Updated Sat, 28 Mar 2015 02:09 AM IST
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पीएनजी महाविद्यालय में ‘बदलते सामाजिक, सांस्कृतिक परिदृश्य में इतिहास के पुर्नपाठ’ की आवश्यकता विषय पर आयोजित दो दिनी राष्ट्रीय संगोष्ठी शुक्रवार को संपन्न हो गई। इस सत्र में कुल 12 शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। शोधार्थियों ने इतिहास को वर्तमान में भी प्रासंगिक बताते हुए इसका समर्थन किया।
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सहायक निदेशक उच्च शिक्षा डा. एके जोशी ने अपना शोक पत्र प्रस्तुत करते हुए धार्मिक संसाधनों, शिला लेखों के इतिहास से जुड़े तथ्यों के महत्व पर प्रकाश डाला। कुमाऊं विवि इतिहास विभाग के डा. संजय घिल्डियाल ने सवर्ल्टन इतिहास के परिप्रेक्ष्य में भारतीय इतिहास लेखन की समस्याओं को सामने रखते हुए अपना पत्र प्रस्तुत किया।
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पीएनजी कालेज में प्रो. डा. संजय कुमार ने अनुभूतियाें एवं भावनाओं के इतिहास को महत्वपूर्ण बताया। डा. संतोष कुमार ने सामाजिक विषमता के संदर्भ में इतिहास के पुर्नपाठ की वकालत की। इस दौरान प्रो. डीकेपी चौधरी, डा. सुधीर नैनवाल, डा. गिरीश पंत, डा. सिराज मुहम्मद, डा. अधीर कुमार, डा. दिनेश शुक्ल, सोनाली कांडपाल, आशा बरगोई, नूपुर अग्रवाल, स्वाती, महेश कुमार ने भी शोध पत्र प्रस्तुत किए।
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संगोष्ठी की अध्यक्षता प्राचार्या डा. हेमा प्रसाद, पूर्व प्राचार्य प्रो. गिरधर सिंह नेगी ने की। सत्र में संगोष्ठी आयोजक डा. विश्वमोहन ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों को धन्यवाद दिया। इस दौरान महाविद्यालय के सभी शिक्षक, शिक्षिकाएं भी मौजूद थे।