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Uttarakhand: भटकती रहीं गर्भवती, इलाज के लिए गिड़गिड़ाता रहा परिवार...नहीं मिली मदद, आगे जो हुआ हैरान कर देगा
Thu, 28 Dec 2023 02:49 PM IST
हीरा मेहरा
अमर उजाला नेटवर्क, अल्मोड़ा
अमर उजाला नेटवर्क, अल्मोड़ा
Published by: हीरा मेहरा
Updated Thu, 28 Dec 2023 02:49 PM IST
सार
उत्तराखंड के अल्मोड़ा से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक गर्भवती महिला भिकियासैंण से रानीखेत तक के अस्पतालों में भटकती रही। लेकिन कहीं मदद नहीं मिली। जब परिवार अपने निजी वाहन से लेकर आ रहा था तो ज्योलीकोट के पास सामान्य प्रसव हो गया।
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गर्भवती महिला
- फोटो : i stock
विस्तार
स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के दावों के बीच देघाट की एक गर्भवती महिला भिकियासैंण से रानीखेत तक के अस्पतालों में भटकती रही। परिवार वाले इलाज के लिए गुहार लगाते रहे, लेकिन कहीं मदद नहीं मिली। पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाओं का न होने का हवाला देकर आखिर में सुशीला तिवारी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। जब परिवार अपने निजी वाहन से लेकर आ रहा था तो ज्योलीकोट के पास सामान्य प्रसव हो गया। बाद में जच्चा-बच्चा को सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
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देघाट के भनेरिया की रहने वाले महेंद्र ने बताया कि वह 23 दिसंबर को देघाट के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पत्नी बसंती (26) को इलाज के लिए लेकर पहुंचे थे। वहां के चिकित्सा कर्मियों ने बताया कि जब लेबर पेन होने पर सीधे भिकियासैंण स्थित सीएचसी ले जाना। बुधवार को जब पत्नी को दर्द शुरू हुआ तो वे घर से करीब 35 किमी दूर भिकियासैंण सीएचसी लेकर पहुंचे। यहां के चिकित्सा कर्मियों ने कहा कि विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं हैं।
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उन्हें करीब 60 किमी दूर रानीखेत के गोविंद सिंह माहरा राजकीय चिकित्सालय भेज दिया। वे ढाई बजे तक रानीखेत के अस्पताल में पहुंचे। वहां के चिकित्सा कर्मियों ने बताया कि बच्चा पेट में टेढ़ा हो गया है। यहां के ऑपरेशन थिएटर में तकनीकी समस्या है। ब्लड बैंक भी दूर है। ऐसे में आप सुशीला तिवारी अस्पताल ले जाओ। उस वक्त पत्नी की हालत बेहद खराब हो गई थी, दर्द भी काफी था। चलना मुश्किल हो रहा था। उनसे भर्ती करने की बहुत गुजारिश की, लेकिन, कोई सुनवाई नहीं हुई। पौने चार बजे तक अस्पताल में रहे, शायद भर्ती कर लिया जाए।
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आखिरकार अपने निजी वाहन से सुशीला तिवारी अस्पताल के लिए चले। छह बजे के आसपास ज्योलीकोट में दर्द बढ़ा तो वाहन को रोका। साथ में उनकी चाची भी थीं, उन्होंने कार में ही प्रसव करा दिया। इसके बाद सुशीला तिवारी अस्पताल पहुंचकर दोनों को भर्ती कराया। घंटों इलाज के लिए भटके, इस अव्यवस्था को लेकर वह आगे शिकायत भी करेंगे। बताया कि अस्पताल में जच्चा-बच्चा दोनों ठीक हैं।
जच्चा-बच्चा अस्पताल में पहुंचे हैं, उनकी हालत ठीक है। चिकित्सा कर्मियों की टीम उनके स्वास्थ्य पर नजर रख रही है।
-डॉ. अरुण जोशी, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी