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पहली बार इतना महंगा बिका काफल
कमलेश जोशी/अमर उजाला, भवाली
Updated Sun, 19 Apr 2015 02:01 AM IST
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बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि की मार का असर काफल पर भी पड़ा है। इससे जहां बाजार में काफल की कीमतों में इस बार कई गुना उछाल आ गया है, वहीं गर्मियों में काफल से रोजगार करने वालों के सामने बेरोजगारी का संकट पैदा हो गया है। शनिवार को इस सीजन में पहली बार यहां बाजार में पहुंचा काफल 400 रुपए किलो बिका। बावजूद इसके देखते ही देखते काफल की टोकरी खाली हो गई।
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जिले के पर्वतीय क्षेत्र में अप्रैल-मई में खूब काफल (वानस्पतिक नाम मैरिकासैपिडा) होता है। इसका फल शुरू में हरा होता है और पकने के बाद गहरा गुलाबी और लाल हो जाता है। काफल गर्मियों में शरीर को शीतलता तो देता ही है, साथ ही इसे खाने से पेट के विकार भी दूर होते हैं। पिछले साल तक बाजार में काफल अधिकतम 150 से 180 रुपए किलो तक बिकता था, लेकिन शनिवार को बेतालघाट ब्लाक के पाडली गांव निवासी हरीराम (60) जब काफल के पांच-पांच किलो के दो टोकरे लेकर पहुंचे तो मंडी में ही खरीदारों की भीड़ लग गई।
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काफल का एक टोकरा तो हल्द्वानी का कोई व्यापारी खरीद ले गया, जबकि दूसरा टोकरा स्थानीय कारोबारी गोपा भाई ने खरीदा। शनिवार को मंडी में काफल का रेट 200-250 के भाव था, जबकि गोपा भाई ने फुटकर में इसे 400 रुपए किलो के हिसाब से बेचा। महंगा होने के बावजूद शाम तक टोकरी खाली हो गई।
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वन रेंज अधिकारी प्रकाश जोशी ने बताया कि विभागीय स्तर पर बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि से नुकसान का जो सर्वे कराया गया है, उसमें पता चला है कि इस बार केवल 10-15 फीसदी ही काफल सुरक्षित रहा है, जबकि शेष ओलावृष्टि के कारण खराब हो गया। जो बचा भी है वह कोसी, नैना, भवाली और मनोरा रेंज में ही है। स्थानीय आढ़ती ज्ञानी बिष्ट ने बताया वह पिछले कई साल से आढ़त चला रहे हैं, लेकिन इतना महंगा काफल आज पहली बार बिका है।