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फायदे का सौदा साबित हो सकती है मशरूम की खेती

Sat, 25 Feb 2017 01:02 AM IST
भूपेश कन्नौजिया
भूपेश कन्नौजिया Updated Sat, 25 Feb 2017 01:02 AM IST
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Mushroom cultivation can be profitable
Mushroom

खेती से मोहभंग के बीच पहाड़ के किसान मशरूम उत्पादन से फायदा ले सकते हैं। यह मानना है खुंब अनुसंधान निदेशालय का। दरअसल पहाड़ी क्षेत्र में उपजाऊ जमीन और पानी की कमी से अब खेतीबाड़ी करना बड़ी चुनौती बन गया है। ऐसे में कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि मशरूम की खेती पहाड़ी काश्तकारों के लिए एक नई उम्मीद हो सकती है।

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हिमाचल प्रदेश के सोलन, चंबाघाट स्थित खुंब अनुसंधान निदेशालय मशरूम को लेकर अनुसंधान कार्य कर रहा है। अनुसंधान में सामने आया है कि शीतोष्ण जलवायु वाले क्षेत्रों में मशरूम की खेती काश्तकारों के लिए काफी लाभकारी हो सकती है। निदेशालय द्वारा देहरादून के महिला स्वयं सहायता समूह को प्रशिक्षण भी दिया गया है। यह समूह मशरूम का उत्पादन कर लाभ अर्जित कर रहा है।
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अमर उजाला से हुई बातचीत में संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. बीएल अत्रि ने बताया कि उत्तराखंड की कई संस्थाओं और बागवानी संस्थानों के साथ मशरूम उत्पादन को लेकर सामूहिक प्रयास चल रहे हैं। जल्द ही किसानों को इसका त्वरित लाभ देखने को मिलेगा।
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कहा कि मेट्रो सिटी के होटल, रेस्तरां में मशरूम की काफी डिमांड रहती है। इसके अलावा इसके औषधीय गुणों को देखते हुए अचानक इसकी डिमांड बढ़ी है। महज 10 गुणा 10 मीटर के कमरे में मशरूम की खेती वैज्ञानिक विधि से खेती करने पर पांच हजार रुपए प्रतिदिन कमाया जा सकता है।

अत्रि ने बताया कि मशरूम पोषक तत्वों की खान है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन, प्रति-आक्सिकारक के अलावा सेलेनियम, कॉपर, पोटेशियम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। लौह तत्व, मैग्नीशियम, जिंक, मैगनीज कम मात्रा में पाया जाता है।

मशरूम में कम कैलोरिज होती हैं। यह मानव शरीर में कोलेस्ट्राल को कम करने, गठिया, खून की कमी, बाल, नाखून, दांतों की सुरक्षा, हड्डियों की मजबूती, कैंसर जैसे रोग के नियंत्रण में सहायक पाया गया है। बताया कि डायबिटीज और ब्लड प्रेशर नियंत्रण में भी यह काफी मददगार है।

डॉ. अत्रि के मुताबिक अनुसंधान के क्षेत्र में मशरूम की अलग-अलग प्रजातियों का देश के अलग-अलग हिस्सों में परीक्षण किया जा रहा है, ताकि इसके उत्पादन को और अधिक बढ़ाया जा सके।


बताया कि फसलों के अवशेषों जैसे तुड़ी, पुआल, मक्का, सोयाबीन, सरसों, गन्ना इत्यादि को कंपोस्ट बनाने में इस्तेमाल करके मशरूम की गुणवत्ता और इसके अधिक उत्पादन पर शोध किया जा रहा है। इसकी पैकिंग और अन्य उत्पाद जैसे अचार, पापड़, बिस्कुट, केक, सूप, पाउडर का उत्पादन कर जल्द ही आम जन तक पहुंच जाएगा।

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