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साल का अंतिम चंद्र ग्रहण: भारत में नहीं दिखेगा, सूतक काल के नियम नहीं होंगे लागू; त्योहार पर नहीं पड़ेगा असर

Thu, 27 Aug 2026 11:17 PM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल Published by: Heera Updated Thu, 27 Aug 2026 11:17 PM IST
सार

वर्ष 2026 का अंतिम चंद्र ग्रहण आज शुक्रवार को रक्षाबंधन के दिन लग रहा है। हालांकि, यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए त्योहार पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं माना जा रहा है। 

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The last lunar eclipse of the year 2026 is taking place on the day of Rakshabandhan
चंद्र ग्रहण 2026

विस्तार

 

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वर्ष 2026 का आखिरी चंद्र ग्रहण आज यानी शुक्रवार को लगने जा रहा है। विशेष बात यह है कि इस बार चंद्र ग्रहण के दिन ही भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन का त्योहार भी मनाया जा रहा है। ज्योतिषियों और खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए त्योहार पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। वहीं खगोल विज्ञान और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिहाज से यह ग्रहण बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

खगोलविदों के अनुसार चंद्र ग्रहण केवल एक दृश्य घटना नहीं है, बल्कि यह चंद्रमा के वायुमंडल और थर्मल व्यवहार के अध्ययन का एक बड़ा अवसर होता है। ग्रहण के दौरान जब पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, तो वहां के तापमान में अचानक भारी गिरावट आती है।

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इस आकस्मिक बदलाव से चंद्रमा की सतह पर मौजूद धूल और चट्टानों की प्रकृति को समझने में वैज्ञानिकों को मदद मिलती है। इसके अलावा पृथ्वी के वायुमंडल से छनकर जाने वाली सूर्य की किरणें जब चंद्रमा तक पहुंचती हैं, तो वैज्ञानिक इसके जरिए पृथ्वी के ओजोन परत और ऊपरी वायुमंडल के घनत्व का भी विश्लेषण करते हैं।

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भारतीय समय के अनुसार यह आंशिक चंद्र ग्रहण 28 अगस्त 2026 को सुबह 6:53 बजे शुरू होगा और दोपहर 12:31 बजे समाप्त होगा। यह चंद्र ग्रहण भारत में अदृश्य है इसलिए यहां सूतक काल के नियम लागू नहीं होंगे और बहनें बिना किसी बाधा के पूरे दिन भाइयों को राखी बांध सकेंगी।

यह ग्रहण मुख्य रूप से साउथ अमेरिकन रीजन में दिखाई देगा। खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले आम लोगों और शोधकर्ताओं के लिए संस्थान व्यवस्था कर रहा है। हम अपने सोशल मीडिया हैंडल पर उन अंतरराष्ट्रीय वेधशालाओं के लाइव स्ट्रीमिंग लिंक डालेंगे जो इस पर शोध कर रही हैं ताकि लोग इस खगोलीय घटना को लाइव देख सकें। - डॉ. वीरेंद्र यादव, केंद्र प्रभारी आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज)

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