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Nainital News: न्याय के साथ रक्षा कवच हैं माँ छिमाल (क्षमा) देवी
Tue, 20 Jun 2023 10:43 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Tue, 20 Jun 2023 10:43 PM IST
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हल्द्वानी। माँ महाकाली की पवित्र भूमि गंगोलीहाट के माँ छिमाल देवी मंदिर में आज बुधवार से भागवत कथा होने जा रही है। हजारों प्रवासी इस महायज्ञ में शामिल होने के लिये पहुच रहे हैं। कई पहुंच गए हैं। यज्ञ 21 से 30 जून तक चलेगा। अब माँ की महत्ता पर नजर डालें कि क्यों माँ क्षमा देवी के दरबार में सभी प्रवासी जुट रहे हैं और पूरे गंगोलीहाट क्षेत्र में उल्लास है।
बुजुर्ग बताते हैं माँ महाकाली, चामुंडा और क्षमा बहनें हैं और इन बहनों ने साथ साथ रहने का वादा किया था। मां छिमाल देवी के बारे में कहा जाता है कि यह लोगों को किसी भी दोष के लिए क्षमा तो करती ही है साथ ही पूरे इलाके की रक्षा करती हैं। इन्हें रक्षा कवच के रूप में भी लोग मानते हैं।
70 से 80 दशक की बात है, इसके प्रत्यक्षदर्शी अभी भी हैं। गंगोलीहाट में व्यापारियों ने दो रात्रि चौकीदार रखे थे। बताते हैं एक दिन क्षमा माता बड़ी बहिन मां काली से मिलने गईं थीं। वह जेवर से सजी धजी थीं। रात्रि चौकीदारों ने समझा कोई महिला भटकी हुई आई है। वह महिला के गहने लूटने के लिए मां के पीछे भागे। मां छिमाल देवी मंदिर के गधेरे (गाड़) तक आईं। वह चौकीदार भी आए। मां गधेरा पार करते ही विलुप्त हो गईं और वह दोनों चौकीदार उसी समय पागल हो गए। यह घटना आज भी प्रत्यक्षदर्शियों को पता है।
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मां चामुंडा यहां एक बार रामायण था। बाबा शंकरगिरी महाराज रामायण में आए थे। एक अल्मोड़ा से प्रोफेसर मां काली के दर्शन के लिए आए थे। जाड़ों के दिन सब जगह घुप अंधेरा। प्रोफेसर मंदिर पहुंचे वहां कोई नहीं। मां काली के अंग रक्षक के बारे में सुना था डर से हालात खराब1। मां चामुंडा ने बाबा से कहा कोई भक्त काली के दरबार में परेशान है। बाबा आए और प्रोफेसर के डर को शांत किया। यह बड़ी कहानी है। अखबार में पूरी नहीं छप सकती।
ज़ट्टू महाराज को खुश करना जरूरी
हल्द्वानी। मां क्षमा देवी के साथ ज़ट्टू महाराज अंग रक्षक के रूप में साथ चलते हैं। ज़ट्टू केवल खिचड़ी का भोग लेते हैं। बच्चों में कोई छल छिद्र छाया हो तो ज़ट्टू तुरंत निवारण करते हैं। मां के दर्शन के साथ जट्टू की पूजा भी जरूरी है।
तीनों देवियों के दर्शन से मिलता है पुण्य लाभ
मां महाकाली के दर्शन के साथ दो और बहनों चामुंडा और क्षमा के दर्शन करने से पुण्य लाभ मिलता है। यह तीनों बहने साथ-साथ स्थापित है।
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बुजुर्ग बताते हैं माँ महाकाली, चामुंडा और क्षमा बहनें हैं और इन बहनों ने साथ साथ रहने का वादा किया था। मां छिमाल देवी के बारे में कहा जाता है कि यह लोगों को किसी भी दोष के लिए क्षमा तो करती ही है साथ ही पूरे इलाके की रक्षा करती हैं। इन्हें रक्षा कवच के रूप में भी लोग मानते हैं।
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70 से 80 दशक की बात है, इसके प्रत्यक्षदर्शी अभी भी हैं। गंगोलीहाट में व्यापारियों ने दो रात्रि चौकीदार रखे थे। बताते हैं एक दिन क्षमा माता बड़ी बहिन मां काली से मिलने गईं थीं। वह जेवर से सजी धजी थीं। रात्रि चौकीदारों ने समझा कोई महिला भटकी हुई आई है। वह महिला के गहने लूटने के लिए मां के पीछे भागे। मां छिमाल देवी मंदिर के गधेरे (गाड़) तक आईं। वह चौकीदार भी आए। मां गधेरा पार करते ही विलुप्त हो गईं और वह दोनों चौकीदार उसी समय पागल हो गए। यह घटना आज भी प्रत्यक्षदर्शियों को पता है।
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मां चामुंडा यहां एक बार रामायण था। बाबा शंकरगिरी महाराज रामायण में आए थे। एक अल्मोड़ा से प्रोफेसर मां काली के दर्शन के लिए आए थे। जाड़ों के दिन सब जगह घुप अंधेरा। प्रोफेसर मंदिर पहुंचे वहां कोई नहीं। मां काली के अंग रक्षक के बारे में सुना था डर से हालात खराब1। मां चामुंडा ने बाबा से कहा कोई भक्त काली के दरबार में परेशान है। बाबा आए और प्रोफेसर के डर को शांत किया। यह बड़ी कहानी है। अखबार में पूरी नहीं छप सकती।
ज़ट्टू महाराज को खुश करना जरूरी
हल्द्वानी। मां क्षमा देवी के साथ ज़ट्टू महाराज अंग रक्षक के रूप में साथ चलते हैं। ज़ट्टू केवल खिचड़ी का भोग लेते हैं। बच्चों में कोई छल छिद्र छाया हो तो ज़ट्टू तुरंत निवारण करते हैं। मां के दर्शन के साथ जट्टू की पूजा भी जरूरी है।
तीनों देवियों के दर्शन से मिलता है पुण्य लाभ
मां महाकाली के दर्शन के साथ दो और बहनों चामुंडा और क्षमा के दर्शन करने से पुण्य लाभ मिलता है। यह तीनों बहने साथ-साथ स्थापित है।