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50 साल में 500 कैडेट्स दे चुका सैनिक स्कूल घोड़ाखाल
कमलेश जोशी/अमर उजाला, भवाली
Updated Sun, 07 Jun 2015 02:12 AM IST
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बच्चों को सैन्य अफसर बनाने में सैनिक स्कूल घोड़ाखाल की महत्वपूर्ण भूमिका है। स्थापना के बाद से यहां अध्ययनरत रहे विद्यार्थी न केवल सैन्य अधिकारी बनकर देश सेवा कर रहे हैं, बल्कि आईएएस और पीसीएस अधिकारी के रूप में भी सेवारत हैं। स्थापना के बाद से अब तक 500 से अधिक कैडेट्स राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में प्रवेश पा चुके हैं। यही कारण है कि सैनिक स्कूल घोड़ाखाल को सात बार रक्षा मंत्रालय ट्राफी से नवाजा जा चुका है। बीते 50 साल में सैनिक स्कूल अपने आप में कई रिकार्ड भी कायम कर चुका है।
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21 मार्च 1966 को घोड़ाखाल में गोलू देवता मंदिर के पास सैनिक स्कूल की स्थापना की गई। रक्षा मंत्रालय के अधीन इस स्कूल का संचालन सैनिक स्कूल सोसायटी के माध्यम से किया जाता है। इसका उद्देश्य बच्चों में देश भक्ति की भावना पैदा करना ही नहीं बल्कि उनकी प्रतिभा को तरासना भी है। बीते वर्षों के दौरान घोड़ाखाल का सैनिक स्कूल देश भर के अन्य सैनिक स्कूलों की अपेक्षा अधिक कैडेट्स को राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में प्रवेश करा चुका है। इस उपलब्धि को देखते हुए ही रक्षा मंत्रालय सात बार स्कूल को रक्षा मंत्रालय ट्राफी से नवाज चुका है। अब तक स्कूल के 500 से अधिक कैडेट एनडीए में प्रवेश कर चुके हैं।
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लैफ्टिनेंट जनरल जेडीएस रावत, ले.जनरल वीके भाटिया, मेजर जनरल वीके भट्ट, वीएम कालिया, अभिनव श्रीवास्तव, जेपी सिंह, अतुल मेहरा, रियर एडमिरल एचसीएस बिष्ट, एयर वाइस मार्शल युगल नेगी ने भी इसी स्कूल में पढ़ाई की। यही नहीं इस स्कूल में अध्ययनरत राम सुभाग सिंह रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव, मनोज पंत पश्चिम बंगाल कैडर के आईएएस अधिकारी, अजय शुक्ला सीतापुर के डीएम, आलम आव नगालैंड के पुलिस महानिरीक्षक के पदों पर रह चुके हैं।
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स्कूल में छठी और नवीं कक्षा में प्रवेश के लिए जनवरी में प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाती है जिसमें 67 फीसदी सीटें उत्तराखंड और 33 फीसदी सीटें अन्य प्रांतों के बच्चों के लिए हैं। सैनिक स्कूल में प्रवेश के लिए भी खासी होड़ लगती है, लेकिन वे बच्चे खुशनसीब होते हैं जिन्हें इस स्कूल में प्रवेश मिलता है।