{"_id":"58641bfb4f1c1b724feeb043","slug":"merge-extended-enlarged-patient-not-the-doctor-increased","type":"story","status":"publish","title_hn":"मर्ज बढ़ा, मरीज बढ़े, नहीं बढ़े डॉक्टर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मर्ज बढ़ा, मरीज बढ़े, नहीं बढ़े डॉक्टर
नवीन सक्सेना
Updated Thu, 29 Dec 2016 01:39 AM IST
विज्ञापन
मुख्यातिथि स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने इन डॉक्टरों को सम्मानित किया।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पिछले सालों में मर्ज बढ़ा है और मरीज भी बढ़े हैं मगर सोबन सिंह जीना बेस चिकित्सालय में सुविधाओं में इजाफा नहीं हुआ है। यहां व्यवस्थाएं बाबा आदम के जमाने की चल रही हैं। एक दशक पूर्व अस्पताल में डॉक्टरों के 18 पद थे, इस लंबे अंतराल में डॉक्टरों के पद नहीं बढ़ाए गए हैं। जबकि अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 1050 से 1100 तक रोगी आते हैं।
विज्ञापन
इसमें मरीजों की सबसे लंबी लाइन फिजीशियन के केबिन के बाहर रहती है। रोजाना उन्हें दिखाने वाले रोगियों की संख्या 300 से अधिक है। बावजूद इसके अस्पताल में फिजीशियन के पद नहीं बढ़ाए गए हैं। इससे रोगियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
विज्ञापन
कुमाऊं में स्वास्थ्य विभाग का 170 बेड का सबसे बड़ा अस्पताल हल्द्वानी में सोबन सिंह जीना बेस चिकित्सालय है। बेस अस्पताल में हल्द्वानी के अलावा पहाड़ से भी बड़ी संख्या में रोगी ओपीडी में दिखाने के लिए पहुंचते हैं मगर इस अस्पताल में पिछले दस पंद्रह सालों में सुविधाओं में कोई इजाफा नजर नहीं आता है।
विज्ञापन
एक दशक पूर्व भी यहां चिकित्सकों के 18 पद थे और आज भी वही पद हैं। जनसंख्या बढ़ने के साथ अस्पताल आने वाले रोगियों की संख्या तो बढ़ी पर चिकित्सकों की संख्या शासन ने नहीं बढ़ाई। अस्पताल में फिजीशियन का एक पद है। इस पद पर डा. पीएस टाकुली तैनात हैं। बुधवार को बेस अस्पताल में ओपीडी का हाल यह था कि दोपहर एक बजे फिजीशियन डा. टाकुली को दिखाने के लिए उनके कक्ष के सामने डेढ़ सौ से अधिक रोगियों की लाइन लगी थी।
जबकि दोपहर तक 50 से अधिक रोगी दिखाकर जा चुके थे। रोगियों की संख्या अधिक होने पर फिजीशियन को अपराह्न तीन बजेे अस्पताल बंद होने के उपरांत सायं चार बजे के बादतक केबिन में बैठना पड़ रहा है। ठंड के मौसम में सर्दी जुकाम और बुखार के रोगी अधिक आ रहे हैं। इसके अलावा चर्मरोग विशेषज्ञ डा. मो. अनवर को दिखाने के लिए 50 से अधिक रोगी लाइन में लगे थे। हड्डी रोग विशेषज्ञ, दंतरोग, नेत्ररोग और बालरोग चिकित्सक के कक्ष के बाहर भी रोगियों की कतारें लगी थी।
जांचें फ्री होने का नहीं पहुंचा आदेश
नोटबंदी होने पर लोगों की दिक्कत को देखते हुए नवंबर में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सरकारी अस्पतालों में आने वाले रोगियों की खून की जांचें निशुल्क होने की सुविधा देने की घोषणा की थी। खून की निशुल्क जांचों की सुविधा 30 दिसंबर तक दी जानी थी मगर अवधि भी खत्म होने वाली है पर अब तक इस संबंध में बेस अस्पताल में शासन से कोई आदेश नहीं आया। इस वजह से रोगियों से खून की सामान्य जांचों का शुल्क वसूला जा रहा है।
अस्पताल में रोजाना 1050 से 1100 के आसपास ओपीडी में रोगी आते हैं। इस स्थिति को देखते हुए अस्पताल की ओर से मुख्यालय एवं शासन को बेस अस्पताल में फिजीशियन समेत अन्य चिकित्सकों के पद बढ़ाने के संबंध में प्रस्ताव भी भेजा गया था। जो कि शासन में ही विचाराधीन है। जिस दिन फिजीशियन डा. टाकुली को कोर्ट गवाही या फिर कहीं बाहर ड्यूटी पर जाना पड़ जाए तो व्यवस्था करना मुश्किल हो जाता है।
- डा. एमएस बोहरा, प्रमुख अधीक्षक, बेस अस्पताल