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बच्चों को याद करने से लेकर लिखने में आ रही दिक्कत आ रही
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हल्द्वानी। कुछ इसी तरह के केस मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग और मनो चिकित्सा विभाग में पहुंच रहे हैं। अभिभावक बच्चों में एकाग्रता की कमी, पढ़ाई के प्रति रुझान कम होने से लेकर याद करने और लिखने में शिकायत को लेकर पहुंच रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सा विभाग के मनोवैज्ञानिक डॉ. युवराज पंत कहते हैं कि करीब डेढ़ साल से बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं, पहले उनका स्कूल जाना और पढ़ने का क्रम था, जो प्रभावित हुआ है और इसका प्रभाव भी पड़ा है। अभी परीक्षा हुई तो माता-पिता ने कई बातों को नोटिस किया है। इसमें बच्चों को याद करने में दिक्कत की बात बताई है, जो पढ़ता है वह याद नहीं रहता है। इसी तरह बच्चों की राइटिंग खराब होने से लेकर लिखावट की गति भी प्रभावित हुई है। इनके अलावा बच्चों को कोई काम बताया जाता है तो उनका कुछ समय बात मन उचाट हो जाता है।
डॉ. पंत कहते हैं कि जिन बच्चों को दिक्कत आ रही है उनके साथ माता-पिता की काउंसिलिंग की जा रही है। उनको बताया जाता है कि यह प्रैक्टिस छूटने के कारण हुआ है। बस अभिभावकों को बच्चों पर नाराज होने से लेकर जल्द अपेक्षा ने करें। यह समझने की जरूरत है।
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लंबे समय से स्कूल की व्यवस्था से बच्चे दूर रहे हैं, जिसका असर उन पर पड़ा है। बच्चों का स्क्रीन टाइम काफी (मोबाइल) बढ़ गया। हर सप्ताह ऐसे छह से सात केस पहुंचते हैं, जिनमें बच्चों में एकाग्रता की कमी, पढ़ने में मन नहीं लगना आदि दिक्कतें हैं। ऐसे मामलों को मनो वैज्ञानिक के पास काउंसिलिंग के लिए भेजा जाता है। - डॉ. ऋतु रखोलिया, एसो. प्रोफेसर, बाल रोग विभाग
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मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सा विभाग के मनोवैज्ञानिक डॉ. युवराज पंत कहते हैं कि करीब डेढ़ साल से बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं, पहले उनका स्कूल जाना और पढ़ने का क्रम था, जो प्रभावित हुआ है और इसका प्रभाव भी पड़ा है। अभी परीक्षा हुई तो माता-पिता ने कई बातों को नोटिस किया है। इसमें बच्चों को याद करने में दिक्कत की बात बताई है, जो पढ़ता है वह याद नहीं रहता है। इसी तरह बच्चों की राइटिंग खराब होने से लेकर लिखावट की गति भी प्रभावित हुई है। इनके अलावा बच्चों को कोई काम बताया जाता है तो उनका कुछ समय बात मन उचाट हो जाता है।
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डॉ. पंत कहते हैं कि जिन बच्चों को दिक्कत आ रही है उनके साथ माता-पिता की काउंसिलिंग की जा रही है। उनको बताया जाता है कि यह प्रैक्टिस छूटने के कारण हुआ है। बस अभिभावकों को बच्चों पर नाराज होने से लेकर जल्द अपेक्षा ने करें। यह समझने की जरूरत है।
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लंबे समय से स्कूल की व्यवस्था से बच्चे दूर रहे हैं, जिसका असर उन पर पड़ा है। बच्चों का स्क्रीन टाइम काफी (मोबाइल) बढ़ गया। हर सप्ताह ऐसे छह से सात केस पहुंचते हैं, जिनमें बच्चों में एकाग्रता की कमी, पढ़ने में मन नहीं लगना आदि दिक्कतें हैं। ऐसे मामलों को मनो वैज्ञानिक के पास काउंसिलिंग के लिए भेजा जाता है। - डॉ. ऋतु रखोलिया, एसो. प्रोफेसर, बाल रोग विभाग