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कुमाऊं में छह जिलों की जिम्मेदारी संभाल रहे दो मलेरिया अधिकारी
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Malariya Day in Rudrapur
रुद्रपुर। आज विश्व मलेरिया दिवस है। स्वास्थ्य विभाग मलेरिया से आम जनता को बचाने को लेकर कितना गंभीर है, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि कुमाऊं मंडल के छह जिलों की जिम्मेदारी दो जिला मलेरिया अधिकारी संभाल रहे हैं। कुमाऊं मंडल के तीन जिलों में जिला मलेरिया अधिकारी व कर्मचारियों के ही पद सृजित नहीं हैं।
उत्तराखंड में जिला मलेरिया अधिकारी कार्यालय की व्यवस्था अब भी अविभाजित यूपी के समय की चल रही है। तराई में मलेरिया महामारी को देखते हुए वर्ष 1952 में रुद्रपुर में जिला मलेरिया अधिकारी कार्यालय स्थापित किया गया था। इस कार्यालय के खुलने के कुछ सालों बाद तराई में मलेरिया प्रकोप काफी कम हुआ। वर्ष 1995 में नैनीताल जिले से कटकर ऊधम सिंह नगर जिला बना है। इसी तरह वर्ष 1997 में चंपावत और बागेश्वर जिले भी बने लेकिन अब तक नैनीताल के जिला मलेरिया अधिकारी का कार्यालय रुद्रपुर में ही चल रहा है। ऊधम सिंह नगर, बागेश्वर और चंपावत जिले में जिला मलेरिया अधिकारी व कर्मचारियों के पद तक सृजित नहीं किए गए हैं। ऊधम सिंह नगर जिले में मलेरिया व अन्य संक्रामक रोगों की समस्या को देखते हुए अल्मोड़ा के जिला मलेरिया अधिकारी बीसी जोशी को यहां संबद्ध किया गया था लेकिन वह भी तीन माह पूर्व सेवानिवृत्त हो चुके हैं। नैनीताल के जिला मलेरिया अधिकारी अर्जुन सिंह राणा भी दो-तीन माह बाद सेवानिवृत्त हो रहे हैं। साथ ही सहायक मलेरिया अधिकारी, मलेरिया इंस्पेक्टर, सीनियर फील्ड वर्कर, फील्ड वर्कर आदि के अधिकतर पद रिक्त चल रहे हैं। वर्तमान में तराई में मच्छरों के आतंक से लोग परेशान हैं। स्टाफ की कमी के कारण मलेरिया की रोकथाम करने में स्वास्थ्य विभाग असहाय नजर आ रहा है।
मलेरिया दिवस पर लोगों को मलेरिया से बचाव के लिए जागरूक किया जाएगा। तराई में मलेरिया महामारी की रोकथाम में जिला मलेरिया अधिकारी कार्यालय नैनीताल के कर्मचारियों व अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वर्तमान में सिर्फ नैनीताल और पिथौरागढ़ के जिला मलेरिया अधिकारी कार्यरत हैं। बागेश्वर, चंपावत और ऊधम सिंह नगर जिले में पद ही सृजित नहीं हैं। - अर्जुन सिंह राणा, जिला मलेरिया अधिकारी
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उत्तराखंड में जिला मलेरिया अधिकारी कार्यालय की व्यवस्था अब भी अविभाजित यूपी के समय की चल रही है। तराई में मलेरिया महामारी को देखते हुए वर्ष 1952 में रुद्रपुर में जिला मलेरिया अधिकारी कार्यालय स्थापित किया गया था। इस कार्यालय के खुलने के कुछ सालों बाद तराई में मलेरिया प्रकोप काफी कम हुआ। वर्ष 1995 में नैनीताल जिले से कटकर ऊधम सिंह नगर जिला बना है। इसी तरह वर्ष 1997 में चंपावत और बागेश्वर जिले भी बने लेकिन अब तक नैनीताल के जिला मलेरिया अधिकारी का कार्यालय रुद्रपुर में ही चल रहा है। ऊधम सिंह नगर, बागेश्वर और चंपावत जिले में जिला मलेरिया अधिकारी व कर्मचारियों के पद तक सृजित नहीं किए गए हैं। ऊधम सिंह नगर जिले में मलेरिया व अन्य संक्रामक रोगों की समस्या को देखते हुए अल्मोड़ा के जिला मलेरिया अधिकारी बीसी जोशी को यहां संबद्ध किया गया था लेकिन वह भी तीन माह पूर्व सेवानिवृत्त हो चुके हैं। नैनीताल के जिला मलेरिया अधिकारी अर्जुन सिंह राणा भी दो-तीन माह बाद सेवानिवृत्त हो रहे हैं। साथ ही सहायक मलेरिया अधिकारी, मलेरिया इंस्पेक्टर, सीनियर फील्ड वर्कर, फील्ड वर्कर आदि के अधिकतर पद रिक्त चल रहे हैं। वर्तमान में तराई में मच्छरों के आतंक से लोग परेशान हैं। स्टाफ की कमी के कारण मलेरिया की रोकथाम करने में स्वास्थ्य विभाग असहाय नजर आ रहा है।
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मलेरिया दिवस पर लोगों को मलेरिया से बचाव के लिए जागरूक किया जाएगा। तराई में मलेरिया महामारी की रोकथाम में जिला मलेरिया अधिकारी कार्यालय नैनीताल के कर्मचारियों व अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वर्तमान में सिर्फ नैनीताल और पिथौरागढ़ के जिला मलेरिया अधिकारी कार्यरत हैं। बागेश्वर, चंपावत और ऊधम सिंह नगर जिले में पद ही सृजित नहीं हैं। - अर्जुन सिंह राणा, जिला मलेरिया अधिकारी
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