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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   Loss of 13.47 million from the private examination unless Kuvivi

कुविवि को प्राइवेट परीक्षा न कराने से 13.47 करोड़ का नुकसान

Wed, 23 Sep 2015 01:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, नैनीताल।
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, नैनीताल। Updated Wed, 23 Sep 2015 01:39 AM IST
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प्रदेश सरकार की ओर से अगर प्राइवेट परीक्षाओं की जिम्मेदारी उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय को सौंपी जाती है तो कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल को भी इसका नुकसान उठाना पड़ेगा। प्राइवेट परीक्षा की जिम्मेदारी कुमाऊं विवि से हटने से विश्वविद्यालय को हर वर्ष करीब 13 करोड़ 47 लाख 54 हजार 860 रूपये का नुकसान होना तय है।

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इस बीच मामले को गंभीरता से लेते हुए कुमाऊं विवि के कर्मचारी संगठनों ने भी राज्यपाल को ज्ञापन भेजकर विवि को वास्तविक मांग के अनुरुप शत प्रतिशत बजट आवंटित नहीं होने तक परीक्षा कराने का जिम्मा यथावत रखने की मांग की है।
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बता दें अमर उजाला के 22 सितंबर के अंक में अब उत्तराखंड मुक्त विवि कराएगा प्राइवेट परीक्षा समाचार प्रमुखता से प्रकाशित हुआ था। समाचार के छपने के बाद कुमाऊं विवि के प्रशासनिक भवन में दिनभर यह मुद्दा चर्चा में रहा।
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विश्वविद्यालय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक हर वर्ष करीब एक लाख परीक्षार्थी कुमाऊं विवि की ओर से आयोजित होने वाली प्राइवेट परीक्षा में शामिल होते हैं। परीक्षाओं के शुल्क आदि से वर्षभर में विवि को 13 करोड़, 47लाख, 54 हजार 860 की आय होती है।

अगर खाली स्नातक प्रथम वर्ष की आय को लें तो वह 5 करोड़, 22 लाख, 68 लाख 22 हजार तथा परास्नातक प्रथम वर्ष की 4 करोड़, 85 लाख 75 हजार है। जहां तक वर्ष 2014 का सवाल है उसमें बीकाम में 4571, बीए में 57 हजार 301 तथा एमए व एमकाम में 36 हजार 761 परीथार्थी शामिल हुए थे।

इस बीच मामले को गंभीरता से लेते हुए कुमाऊं विवि प्रशासनिक भवन शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ के अध्यक्ष दीपक सिंह बिष्ट व सचिव नवल किशोर बिनवाल,डीएसबी शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ के अध्यक्ष कुंवर सिंह जलाल व सचिव कुंवर सिंह बिष्ट ने राज्यपाल को ज्ञापन भेजा है जिसमें उन्होंने कहा है कि प्राइवेट परीक्षा के परीक्षा शुल्क से हर वर्ष करीब 15 करोड़ की आय होती है जिसे शासन द्वारा विवि की मांग के सापेक्ष घटाते हुए अनुदान अवमुक्त किया जाता है। उन्होंने कहा है कि विवि के पास प्राइवेट परीक्षार्थियों के परीक्षा शुल्क के अलावा कोई भी आय का साधन नहीं है।

उन्होंने राज्यपाल से मांग की है कि जब तक विश्वविद्यालय की वास्तविक मांग के अनुरुप शत-प्रतिशत बजट विवि को आवंटित नहीं करता तब तक प्राइवेट परीक्षा की जिम्मेदारी विवि को ही दी जाए यही विवि व कर्मचारी हित में उचित होगा।


इस बीच कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो.होशियार सिंह धामी ने कहा कि प्राइवेट परीक्षा से होने वाली आय की प्रतिपूर्ति अगर प्रदेश सरकार कर दे तो इसमें कोई हर्ज नहीं है। उन्होंने कहा कि मामले में 24 सितंबर को देहरादून में राज्यपाल डा.केके पाल की अध्यक्षता में बैठक होने वाली है। वहां पर वह विवि के इस मुद्दे को प्राथमिकता से उठाऐंगे।

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