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कुमाऊं विवि को विस्तार के लिए जल्द मिलेगी पटवाडांगर की 103 एकड़ भूमि
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हल्द्वानी। कुमाऊं विश्वविद्यालय को पटवाडांगर की 103 एकड़ जमीन जल्द मिल सकती है। इसकी प्रक्रिया शासन में तेजी से चल रही है। पंतनगर विश्वविद्यालय की इस जमीन को कुमाऊं विश्वविद्यालय को हस्तांतरित करने पर राज्यपाल ने भी अपनी सहमति जताते हुए शासन को कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं। इस भूमि के मिलने के बाद कुमाऊं विश्वविद्यालय के कई बहुप्रतिक्षित पाठ्यक्रम शुरू हो सकेंगे।
कुमाऊं विश्वविद्यालय के पास जमीन का अभाव होने के कारण लंबे समय से विस्तारीकरण की कोई योजना नहीं सकी है। इस वजह से विश्वविद्यालय विद्यार्थियों की डिमांड के हिसाब से नये पाठ्यक्रम भी नहीं खोल पा रहा है, केवल परंपरागत कोर्स ही चल रही है। इस कमी को मौजूदा कुलपति प्रो. केएस राना ने महसूस किया। उन्होंने अपनी टीम के साथ विश्वविद्यालय से पांच किलोमीटर दूर पटवाडांगर की 103 एकड़ भूमि का निरीक्षण किया और पंतनगर विवि से यह भूमि कुमाऊं विवि को दिलाए जाने का प्रस्ताव तैयार कर कुलाधिपति एवं राज्यपाल बेबीरानी मौर्य को भेज दिया। कुलपति ने इस प्रस्ताव में पटवाडांगर की भूमि कुमाऊं विवि को दिए जाने के कई ठोस तर्क दिए हैं।
पंतनगर विश्वविद्यालय की दूरी करीब 90 किलोमीटर होने के कारण पटवाडांगर की भूमि का सदुपयोग नहीं हो पा रहा है। पंतनगर विवि द्वारा यहां जैव प्रौद्योगिक संस्थान संचालित किया जा रहा है जबकि यहां कई ऐसे पाठ्यक्रम संचालित किए जा सकते हैं, जो युवाओं की पसंद के हों। कुमाऊं विवि के इस प्रस्ताव पर कुलाधिपति एवं राज्यपाल बेबीरानी मौर्या ने सैद्धांतिक सहमति जताते हुए शासन को इस संबंध में कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं। बताते हैं कि शासन स्तर पर इस संबंध में लगभग सहमति बन गई तथा जल्द यह भूमि पंतनगर विश्वविद्यालय से वापस लेकर कुमाऊं विवि को मिल जाएगी।
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पटवाडांगर की जमीन कुमाऊं विवि को जल्द मिलने की उम्मीद है। कुलाधिपति एवं राज्यपाल बेबीरानी मौर्य और उच्चशिक्षामंत्री डा. धनसिंह रावत ने सहमति भी दे दी है। वहां विस्तार कर सेंट्रलाइज कैंपस बनाने की योजना है। इसके साथ ही हिमालयन जड़ी बूटी से संबंधित कोर्स भी खोलने की योजना है।
- प्रो. केएस राना, कुलपति कुमाऊं विवि नैनीताल
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कुमाऊं विश्वविद्यालय के पास जमीन का अभाव होने के कारण लंबे समय से विस्तारीकरण की कोई योजना नहीं सकी है। इस वजह से विश्वविद्यालय विद्यार्थियों की डिमांड के हिसाब से नये पाठ्यक्रम भी नहीं खोल पा रहा है, केवल परंपरागत कोर्स ही चल रही है। इस कमी को मौजूदा कुलपति प्रो. केएस राना ने महसूस किया। उन्होंने अपनी टीम के साथ विश्वविद्यालय से पांच किलोमीटर दूर पटवाडांगर की 103 एकड़ भूमि का निरीक्षण किया और पंतनगर विवि से यह भूमि कुमाऊं विवि को दिलाए जाने का प्रस्ताव तैयार कर कुलाधिपति एवं राज्यपाल बेबीरानी मौर्य को भेज दिया। कुलपति ने इस प्रस्ताव में पटवाडांगर की भूमि कुमाऊं विवि को दिए जाने के कई ठोस तर्क दिए हैं।
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पंतनगर विश्वविद्यालय की दूरी करीब 90 किलोमीटर होने के कारण पटवाडांगर की भूमि का सदुपयोग नहीं हो पा रहा है। पंतनगर विवि द्वारा यहां जैव प्रौद्योगिक संस्थान संचालित किया जा रहा है जबकि यहां कई ऐसे पाठ्यक्रम संचालित किए जा सकते हैं, जो युवाओं की पसंद के हों। कुमाऊं विवि के इस प्रस्ताव पर कुलाधिपति एवं राज्यपाल बेबीरानी मौर्या ने सैद्धांतिक सहमति जताते हुए शासन को इस संबंध में कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं। बताते हैं कि शासन स्तर पर इस संबंध में लगभग सहमति बन गई तथा जल्द यह भूमि पंतनगर विश्वविद्यालय से वापस लेकर कुमाऊं विवि को मिल जाएगी।
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पटवाडांगर की जमीन कुमाऊं विवि को जल्द मिलने की उम्मीद है। कुलाधिपति एवं राज्यपाल बेबीरानी मौर्य और उच्चशिक्षामंत्री डा. धनसिंह रावत ने सहमति भी दे दी है। वहां विस्तार कर सेंट्रलाइज कैंपस बनाने की योजना है। इसके साथ ही हिमालयन जड़ी बूटी से संबंधित कोर्स भी खोलने की योजना है।
- प्रो. केएस राना, कुलपति कुमाऊं विवि नैनीताल