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Saraswati Tamta: जानिए कौन थीं कुमाऊं की पहली महिला विधायक, बागेश्वर के विकास की रखी थी नींव
Fri, 20 Oct 2023 12:29 PM IST
हीरा मेहरा
मयंक जोशी, संवाद
मयंक जोशी, संवाद
Published by: हीरा मेहरा
Updated Fri, 20 Oct 2023 12:29 PM IST
सार
बागेश्वर विधानसभा सीट से कुमाऊं की पहली महिला विधायक बनीं सरस्वती टम्टा ऐसी ही राजनीतिक शख्सियत रहीं। उन्हें बागेश्वर में विकास की नींव रखने के लिए जाना जाता है। सरस्वती टम्टा का जन्म 20 जनवरी 1932 में बागेश्वर के चौगांवछीना में हुआ था।
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सरस्वती टम्टा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम लाया गया है। इस कानून के लागू होने से लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित हो जाएंगी लेकिन 70-80 के दशक में गिनी चुनी महिलाएं ही अपनी नेतृत्व क्षमता के दम पर विधानसभा या लोकसभा पहुंचती थीं।
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बागेश्वर विधानसभा सीट से कुमाऊं की पहली महिला विधायक बनीं सरस्वती टम्टा ऐसी ही राजनीतिक शख्सियत रहीं। उन्हें बागेश्वर में विकास की नींव रखने के लिए जाना जाता है। सरस्वती टम्टा का जन्म 20 जनवरी 1932 में बागेश्वर के चौगांवछीना में मनोरथ राम टम्टा के घर हुआ था। उन्होंने मसूरी के विद्या विनोदिनी और मध्यमा आर्या कन्या विद्यालय से पढ़ाई की। 11 जनवरी 1946 में उनका विवाह अल्मोड़ा के कांग्रेस नेता बीएल टम्टा से हुआ।
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उनके दो पुत्र और तीन पुत्रियां हुईं। सरस्वती ने अपने पति से राजनीति का ककहरा सीखा। 1952 में वह कांग्रेस से जुड़ीं और 1962 में अल्मोड़ा जिला परिषद की सदस्य बनीं। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी और एआईसीसी में कई वर्षों तक सदस्य रहीं।
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अविभाजित उत्तरप्रदेश में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित बागेश्वर विधानसभा सीट पर 1969 में कांग्रेस ने सरस्वती टम्टा को टिकट दिया गया। इस चुनाव में सरस्वती देवी ने भारतीय जनसंघ के मोहन चंद्र को 2032 मतों से हराकर उत्तरप्रदेश विधानसभा में कुमाऊं की पहली महिला विधायक और उत्तराखंड की पहली अनुसूचित जाति की महिला विधायक होने का गौरव प्राप्त किया।
वर्ष 1974 में सरस्वती देवी कांग्रेस के टिकट पर प्रतिद्वंदी बीजेएस के आनंद दास को 6401 मतों से हराया। 1994 में उत्तराखंड आंदोलन में कांग्रेस पार्टी से सक्रिय भाग लिया और महिला आंदोलनों में सक्रिय रहीं। 30 अप्रैल 2007 को उन्होंने अंतिम सांस ली।
बागेश्वर में डिग्री कॉलेज और तहसील बनाने का श्रेय
सरस्वती देवी के पुत्र एड. विमल कुमार टम्टा ने बताया कि विधायक बनने के बाद उन्होंने बागेश्वर को तहसील का दर्जा दिलाने का कार्य किया। 1974 में बागेश्वर डिग्री कॉलेज की स्थापना का श्रेय भी इन्हें जाता है। बागेश्वर में प्रशासनिक इकाइयों के विस्तार के साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क सुविधाओं का विस्तार कर उन्होंने विकास का खाका खींचा।