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गढ़वाल के राजा फतेह शाह ने भेंट की थी कुमाऊं के राजा को मां नंदा की प्रतिमा

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 15 Sep 2021 02:50 AM IST
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King Fateh Shah of Garhwal presented the statue of Mother Nanda to the King of Kumaon
नैनीताल। प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो. अजय रावत का कहना है कि 1660 वीं ईसवी में मुताबिक राजा अजय पाल के वंशज राजा फतेह शाह ने गढ़वाल को और अधिक शक्तिशाली बनाया जिससे महाराज शिवाजी भी प्रभावित थे। जैसे ही कुमाऊं के राजा बाज बहादुर चंद को राजा फतेह शाह के शौर्य की जानकारी हुई तो उन्होंने राजा फतेह शाह से पूछा कि आखिर वह इतने अधिक शक्तिशाली कैसे हैं। तब गढ़वाल के शासक का जवाब था उनकी रक्षा स्वयं माता नंदा करती हैं।
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तब राजा बाज बहादुर चंद ने फतेह शाह से विशेष अनुरोध किया कि वह उन्हें भी मा नंदा की एक प्रतिष्ठित प्रतिमा दिला दें। प्रतिमा मिलने के बाद राजा बाज बहादुर अल्मोड़ा को रवाना हुए और रात्रि विश्राम के लिए डंगोली के कोट भ्रामरी मंदिर में रुके। वहां सुबह मां नंदा की प्रतिमा दो टुकड़ों में बटी नजर आई। प्रो. रावत बताते हैं कि तभी से कुमाऊं में माता नंदा को नंदा सुनंदा के रूप में पूजा जाने लगा।
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अपनी पुस्तक कल्चरल हिस्ट्री आफ उत्तराखंड के हवाले से प्रो. रावत ने बताया कि सातवीं शताब्दी में बद्रीनाथ के बामणी गांव से नंदा देवी महोत्सव की शुरूआत हुई, जो फूलों की घाटी के घांघरिया से होते हुए गढ़वाल पहुंची। तब गढ़वाल 52 गण पतियों (सूबों) में बंटा हुआ था। उनमें चांदपुर गढ़ी के शासक कनक पाल सबसे शक्तिशाली थे। उन्होंने ही सबसे पहले गढ़वाल में नंदा देवी महोत्सव शुरू किया। प्रो. रावत बताते हैं कि आज भी बामणी गांव में मां नंदा का महोत्सव धूमधाम के साथ मनाया जाता है।
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