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Uttarakhand: कैलाश मानसरोवर यात्रा हुई महंगी, 35 हजार रुपये बढ़ा खर्च; प्रति यात्री देने होंगे 2.09 लाख

Wed, 06 May 2026 10:32 AM IST
गायत्री जोशी संवाद न्यूज एजेंसी
संवाद न्यूज एजेंसी Published by: गायत्री जोशी Updated Wed, 06 May 2026 10:32 AM IST
सार

कैलाश मानसरोवर यात्रा के खर्च में 35 हजार रुपये की बढ़ोत्तरी कर दी गई है। सरकार ने यात्रा के शुल्क की घोषणा कर दी है।

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Kailash Mansarovar Yatra becomes costlier, cost increased by 35 thousand
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : संवाद

विस्तार

कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए यात्रियों की संख्या बढ़ाने के बाद अब यात्रा के खर्च में भी 35 हजार रुपये की वृद्धि कर दी गई है। यात्रा खर्च बढ़ाने के पीछे डॉलर की कीमत बढ़ने का हवाला दिया गया है। बीते वर्ष यात्रा का कुल खर्च 1.74 लाख रुपये था जो इस बार 2.09 लाख हो गया है। इसमें केएमवीएन को देय राशि 65 हजार रुपये शामिल है। भारतीय क्षेत्र में यात्रा, आवास, भोजन, गाइड आदि की व्यवस्था कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) करता है। बीते वर्ष केएमवीएन की ओर से लिया जाने वाला शुल्क 57 हजार रुपये प्रति यात्री था जिसमें इस बार आठ हजार रुपये की वृद्धि की गई है। तिब्बत में वीजा सहित अन्य खर्च अलग से विदेश मंत्रालय को देय होंगे जिसमें 1400 डॉलर शामिल हैं। सरकार ने यात्रा के शुल्क की घोषणा कर दी है। यात्रियों का रजिस्ट्रेशन भी शुरू हो चुका है। बीते वर्ष 10 समूहों में कुल 250 यात्री गए थे। इस वर्ष 50-50 यात्रियों के 10 दल जाएंगे।

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स्वतंत्रता के बाद शुरू हुई यात्रा दो बार रोकनी पड़ी

कैलाश मानसरोवर यात्रा 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद प्रारंभ हुई थी और 1962 में भारत चीन युद्ध के दौर में बंद हो गई थी। इसके बाद 1981 में यात्रा दोबारा प्रारंभ हुई जो वर्ष 2019 तक जारी रही। इसके बाद कोरोना के कारण यह यात्रा 2 वर्ष तक आयोजित नहीं की गई और फिर भारत चीन संबंधों में तनाव के चलते वर्ष 2025 तक यह यात्रा पुनः प्रारंभ नहीं हो सकी। वर्ष 2025 में यात्रा फिर से प्रारंभ की गई और पूर्व के यात्रा मार्ग में बदलाव करते हुए पहली बार चंपावत और टनकपुर होते हुए यह यात्रा कराई गई। इस वर्ष भी यात्रा इसी मार्ग से कराई जाएगी जिसमें यात्रा के दौरान जागेश्वर, चितई आदि धार्मिक स्थलों का भ्रमण भी कराया जाएगा।

केएमवीएन केवल भारतीय क्षेत्र की सुविधा के लिए लेता है शुल्क... केएमवीएन निगम की ओर से ली जाने वाली राशि केवल भारतीय क्षेत्र में व्यवस्थाओं के लिए है। तिब्बती क्षेत्र में अन्य खर्च के लिए सरकार की ओर से पृथक से डॉलर में शुल्क लिया जाता है। कुल शुल्क में यात्रा खर्च, वीजा, तिब्बत में होने वाला व्यय आदि शामिल हैं। 
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