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सड़क हादसा: अंधेरे में मौत का रास्ता बनी टांडा जंगल से गुजरने वाली सड़क, 11 माह में 10 लोगों की गई जान

Tue, 03 Nov 2026 10:54 AM IST
गायत्री जोशी संवाद न्यूज एजेंसी, हल्द्वानी
संवाद न्यूज एजेंसी, हल्द्वानी Published by: गायत्री जोशी Updated Tue, 03 Nov 2026 10:54 AM IST
सार

टांडा जंगल रोड पर अंधेरा, खतरनाक मोड़ और तेज रफ्तार हादसों को न्योता दे रहे हैं। जनवरी से अब तक पांच हादसों में 10 लोगों की मौत हो चुकी है।

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Road passing through Tanda forest claims 10 lives in 11 months
हल्द्वानी टांडा रोड पर हुए एक्सीडेंट के बाद घटनास्थल की जांच करती पुलिस। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हल्द्वानी के टांडा जंगल से गुजरने वाली सड़क पर हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। अंधेरे में डूबी सड़क, जानलेवा एस मोड़, बेलगाम रफ्तार और जंगली जानवरों की आवाजाही के बीच हर दिन हजारों वाहन चालक अपनी जान जोखिम में डालकर सफर कर रहे हैं। हादसे दर हादसे हो रहे हैं, जिंदगियां उजड़ रही हैं लेकिन जिम्मेदार विभागों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। न पूरे मार्ग पर स्ट्रीट लाइटें लगीं, न खतरनाक मोड़ों पर रफ्तार थामने के इंतजाम हुए और न ही वन्यजीवों से बचाव के पर्याप्त उपाय किए गए। सोमवार रात एस मोड़ पर दो बाइकों की आमने-सामने की भिड़ंत में वीडीओ सौरभ बिष्ट और राजू गुप्ता की मौत ने एक बार फिर सिस्टम की लापरवाही को बेनकाब कर दिया।

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टांडा जंगल रोड पर रात में सफर करना किसी खतरे से कम नहीं है। कई हिस्सों में सड़क किनारे रोशनी का कोई इंतजाम नहीं है। हाईवे होने के कारण वाहन तेज रफ्तार से दौड़ते हैं। एस मोड़ पर सामने से आने वाले वाहन का अंदाजा लगाना तक मुश्किल हो जाता है। जनवरी 2026 से अब तक टांडा जंगल के मार्ग पर पांच ऐसे हादसे सामने आ चुके हैं जिनमें 10 लोगों की जान चली गई। इनमें वाहनों की आमने-सामने की भिड़ंत और वन्यजीवों से टकराने जैसी घटनाएं शामिल हैं। सोमवार रात का हादसा भी इसी कड़ी में एक और दर्दनाक घटना बन गया। लगातार हो रही मौतों के बावजूद सड़क पर सुरक्षा इंतजामों में कोई बड़ा बदलाव नजर नहीं आ रहा।

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नेटवर्क गायब, हादसे के बाद मदद पहुंचने में भी खतरा

जंगल के बीच से गुजरने वाले इस मार्ग पर कई स्थानों पर मोबाइल नेटवर्क की समस्या रहती है। ऐसे में हादसे के बाद पुलिस और एंबुलेंस को सूचना देना भी चुनौती बन जाता है। सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति के लिए शुरुआती एक घंटा यानी गोल्डन आवर बेहद अहम होता है। लेकिन नेटवर्क नहीं होने पर सूचना देने में ही कीमती समय निकलने का खतरा बना रहता है। सोमवार रात हुए हादसे में भी राहगीर की सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और चारों घायलों को अस्पताल भिजवाया।

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हादसे के बाद अस्पताल में मचा कोहराम, शवों से लिपटकर रोए परिजन

सोमवार रात हुए हादसे ने दो परिवारों की खुशियां छीन लीं। सौरभ बिष्ट और राजू गुप्ता की मौत की सूचना मिलते ही अस्पताल पहुंचे परिजनों में चीख-पुकार मच गई। राजू की भांजी भावना की 15 नवंबर को शादी होनी थी। घर में शादी की तैयारियां चल रही थीं लेकिन मामा की मौत ने खुशियों को मातम में बदल दिया। वहीं सौरभ के परिजन उनके शव से लिपटकर बिलख पड़े। एक साल पहले ही ग्राम विकास अधिकारी बने सौरभ परिवार के इकलौते बेटे थे।

सवाल जो जिम्मेदारों से जवाब मांग रहे हैं

टांडा जंगल रोड के अंधेरे हिस्सों में अब तक स्ट्रीट लाइटें क्यों नहीं लगाई गईं?

एस मोड़ जैसे दुर्घटना संभावित स्थान पर रफ्तार नियंत्रित करने के इंतजाम क्यों नहीं हैं?

वन्यजीवों की आवाजाही वाले मार्ग पर वाहन चालकों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?

मोबाइल नेटवर्क की समस्या दूर करने और आपातकालीन मदद पहुंचाने की व्यवस्था कब होगी?

पांच हादसों में 10 मौतों के बाद भी सड़क सुरक्षा का स्थायी समाधान क्यों नहीं किया गया?

एक साल में 10 फीसदी बढ़े सड़क हादसे

हल्द्वानी। जिले के कई क्षेत्रों में सड़क हादसों का सिलसिला थम नहीं रहा है। जिले में वर्ष 2025 के मुकाबले वर्ष 2026 में सड़क हादसे 10 फीसदी तक बढ़ गए हैं। सितंबर में सामने आई केंद्रीय सड़क सुरक्षा समिति की रिपोर्ट के अनुसार, पूरे राज्य में ओवर स्पीडिंग की वजह से हुए हादसों में 28.1 फीसदी तक का इजाफा हुआ है। सड़क सुरक्षा समिति में शामिल होने वाले विभागों के अनुसार राज्य में 419 हॉट-स्पॉट भी चिह्नित किए गए थे। वर्ष 2025 में जहां 1289 हादसे रिकॉर्ड में दर्ज हुए वहीं अगस्त 2026 तक यह आंकड़ा 1480 पहुंच गया।

15 सितंबर से 2 नवंबर के बीच करीब डेढ़ माह में आठ बड़े सड़क हादसों में 13 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें तीन किशोरों की जान लेने वाला तीनपानी फ्लाईओवर हादसा भी शामिल है। लगातार हो रही मौतों के बावजूद सड़क सुरक्षा और यातायात नियंत्रण के इंतजामों पर सवाल बने हुए हैं।

डेढ़ माह में सबसे गंभीर हादसों में तीनपानी फ्लाईओवर पर 23 अक्तूबर हुआ हादसा रहा। तेज रफ्तार कार डिवाइडर से टकराकर पलट गई, जिसमें तीन किशोरों की मौत हो गई। कठघरिया में 24 सितंबर को बाइक की टक्कर से 13 वर्षीय कपिल मौर्य की जान चली गई।

इससे पहले एक अक्तूबर को हल्दूचौड़ में डंपर की टक्कर से 14 वर्षीय प्रेरणा की मौत हुई। तीन अक्तूबर को बेरीपड़ाव में सड़क पार कर रहे 55 वर्षीय किशन चौधरी को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। चार अक्तूबर को लालकुआं क्षेत्र में स्कूटी सवार आनंद सिंह पवार की भी सड़क हादसे में मौत हो गई। वहीं सुभाषनगर में कैंटर और स्कूटी की भिड़ंत में दो युवकों की जान चली गई।
 

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