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Nainital News: अपनी सुरक्षा के लिए धरने पर बैठे जूनियर रेजिडेंट
Wed, 21 Aug 2024 06:03 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Wed, 21 Aug 2024 06:03 AM IST
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हल्द्वानी। कोलकाता में जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर के साथ दरिंदगी मामले में दोषियों को फास्ट ट्रैक कोर्ट से सख्त सजा देने समेत अन्य मांगों को लेकर राजकीय मेडिकल कॉलेज के जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों ने ओपीडी का बहिष्कार किया। उन्होंने मेडिकल कॉलेज की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाकर डॉक्टरों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने पर जोर दिया। बहिष्कार के कारण सीनियर डॉक्टरों ने ओपीडी में मरीजों को देखा।
अस्पतालों में सुरक्षित नहीं हैं डॉक्टर, अपराधी को सजा दो, जहां सुरक्षा नहीं वहां ड्यूटी नहीं... आदि नारे लिखी तख्तियां लेकर जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर सुबह नौ बजे सुशीला तिवारी अस्पताल पहुंचे। इसके बाद ओपीडी का बहिष्कार कर परिसर में ही धरने पर बैठ गए। उन्होंने कोलकाता में हुई दरिंदगी का हवाला देते हुए मेडिकल कॉलेज में भी डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए। कहा कि सुशीला तिवारी अस्पताल में इमरजेंसी, आईसीयू और वार्डों में 24 घंटे गार्ड तैनात नहीं रहते हैं। यहां वार्डों में भी कैमरे नहीं हैं। पुरुष और महिला डॉक्टरों के लिए अलग-अलग कमरे तक नहीं हैं। डॉ. विवेक कुमार ने बताया कि वार्डों में डॉक्टरों के शौचालय भी गंदे रहते हैं। उन्होंने अस्पताल की गलियों, लिफ्ट में बेहतर लाइट लगाने, प्रत्येक वार्ड में पीने का पानी मुहैया कराने की मांग की। मरीजों के तीमारदारों के लिए गेट पास प्रणाली बनाने, प्रत्येक मरीज के साथ अधिकतम दो तीमारदार रखने, कर्मचारियों, वार्ड बॉय, कैंटीन कर्मचारी, एंबुलेंस चालक आदि के लिए ड्रेस कोड लागू करने की भी मांग की। दोपहर तक धरने के बाद फिर प्राचार्य डॉ. अरुण जोशी ने जेआर को समझाया। इसके बाद जूनियर डॉक्टरों ने इमरजेंसी और आईसीयू में ड्यूटी शुरू की। दोपहर तक ओपीडी में सीनियर डॉक्टरों ने कामकाज संभाला। धरने पर डॉ. अभिषेक, डॉ. आकाश, डॉ. सौरभ, डॉ. सुशिता, डॉ. रचित, डॉ. शैली, डॉ. मानसी, डॉ. विशाल समेत विभिन्न विभागों के जूनियर डॉक्टर मौजूद रहे।
हमारी मांगें अभी नहीं मानी गई हैं। जब तक मांगे पूरी नहीं हो जाती वह लोग आंदोलन जारी रखेंगे।
डॉ. विवेक कुमार, जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के प्रवक्ता
सुप्रीम कोर्ट की गाडडलाइन है कि हड़ताल से जनता को परेशानी नहीं होनी चाहिए। इस बारे में जूनियर डॉक्टरों को समझाया गया है। कॉलेज स्तर की मांगों को पूरा करने का प्रयास होगा। सुरक्षा गार्डों और कैमरों की संख्या भी बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं।
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डॉ. अरुण जोशी, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज
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अस्पतालों में सुरक्षित नहीं हैं डॉक्टर, अपराधी को सजा दो, जहां सुरक्षा नहीं वहां ड्यूटी नहीं... आदि नारे लिखी तख्तियां लेकर जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर सुबह नौ बजे सुशीला तिवारी अस्पताल पहुंचे। इसके बाद ओपीडी का बहिष्कार कर परिसर में ही धरने पर बैठ गए। उन्होंने कोलकाता में हुई दरिंदगी का हवाला देते हुए मेडिकल कॉलेज में भी डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए। कहा कि सुशीला तिवारी अस्पताल में इमरजेंसी, आईसीयू और वार्डों में 24 घंटे गार्ड तैनात नहीं रहते हैं। यहां वार्डों में भी कैमरे नहीं हैं। पुरुष और महिला डॉक्टरों के लिए अलग-अलग कमरे तक नहीं हैं। डॉ. विवेक कुमार ने बताया कि वार्डों में डॉक्टरों के शौचालय भी गंदे रहते हैं। उन्होंने अस्पताल की गलियों, लिफ्ट में बेहतर लाइट लगाने, प्रत्येक वार्ड में पीने का पानी मुहैया कराने की मांग की। मरीजों के तीमारदारों के लिए गेट पास प्रणाली बनाने, प्रत्येक मरीज के साथ अधिकतम दो तीमारदार रखने, कर्मचारियों, वार्ड बॉय, कैंटीन कर्मचारी, एंबुलेंस चालक आदि के लिए ड्रेस कोड लागू करने की भी मांग की। दोपहर तक धरने के बाद फिर प्राचार्य डॉ. अरुण जोशी ने जेआर को समझाया। इसके बाद जूनियर डॉक्टरों ने इमरजेंसी और आईसीयू में ड्यूटी शुरू की। दोपहर तक ओपीडी में सीनियर डॉक्टरों ने कामकाज संभाला। धरने पर डॉ. अभिषेक, डॉ. आकाश, डॉ. सौरभ, डॉ. सुशिता, डॉ. रचित, डॉ. शैली, डॉ. मानसी, डॉ. विशाल समेत विभिन्न विभागों के जूनियर डॉक्टर मौजूद रहे।
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हमारी मांगें अभी नहीं मानी गई हैं। जब तक मांगे पूरी नहीं हो जाती वह लोग आंदोलन जारी रखेंगे।
डॉ. विवेक कुमार, जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के प्रवक्ता
सुप्रीम कोर्ट की गाडडलाइन है कि हड़ताल से जनता को परेशानी नहीं होनी चाहिए। इस बारे में जूनियर डॉक्टरों को समझाया गया है। कॉलेज स्तर की मांगों को पूरा करने का प्रयास होगा। सुरक्षा गार्डों और कैमरों की संख्या भी बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं।
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डॉ. अरुण जोशी, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज