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जलपैक फैक्ट्री की संपत्ति का ब्यौरा जुटाया
ब्यूरो/अमर उजाला, हल्दूचौड़
Updated Thu, 04 Jun 2015 12:49 AM IST
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हाईकोर्ट के निर्देश पर बुधवार को भारत सरकार कारपोरेट मंत्रालय के कंपनी अभियोजक और आरसेल कंपनी के अधिकारियों ने यहां सील की गई जलपैक इंडिया लिमिटेड कंपनी को तोड़कर संपत्ति के संबंध में जांच की। राजस्व विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में हुई इस कार्रवाई के दौरान पुलिस बल भी मौजूद रहा। अधिकारियों ने बताया कि रिपोर्ट मंत्रालय को भेजी जाएगी। बाद में कंपनी की संपत्ति की नीलामी कर कर्मचारियों के बकाये का भुगतान किया जाएगा।
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बता दें कि जलपैक इंडिया लिमिटेड के कर्मचारियों को वेतन नहीं दिए जाने को लेकर सितंबर 2013 से फैक्ट्री में उत्पादन बंद हो गया था। इसके चलते यहां कार्यरत 124 कर्मचारियों को अक्तूबर 2013 से वेतन, पीएफ ग्रेच्युटी आदि का भुगतान नहीं हो सका। बकाये की मांग को लेकर कर्मचारियों ने हाईकोर्ट की शरण ली।
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हाईकोर्ट के आदेश आने तक कर्मचारी 23 मई 2014 तक कंपनी में कार्य करते रहे। उसके बाद राजस्व विभाग ने कंपनी को सील कर दिया और मामला कोर्ट में चलता रहा। अब बुधवार को भारत सरकार कारपोरेट मंत्रालय कंपनी के अभियोजक सौरव इंदौरा, तकनीकी सहायक मोहम्मद आरिफ एवं आरसेल कंपनी के कर्मचारियों ने बुधवार को राजस्व विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में कंपनी के दरवाजों पर लगी सील तोड़कर कंपनी की संपत्ति का ब्यौरा जुटाया।
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इधर, सूचना पर कंपनी में कार्यरत अन्य कर्मचारी भी मुख्य गेट के पास पहुंच गए और जांच के लिए आई टीम को घेर लिया। सूचना पर हल्दूचौड चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और कर्मचारियों को हटाया। कर्मचारियों ने बकाये के भुगतान को लेकर नारेबाजी भी की। वहीं संपत्ति का ब्यौरा एकत्र करने के बाद अधिकारियों ने फैक्ट्री को फिर से सील कर दिया। मामले की रिपोर्ट भारत सरकार को भेजी जाएगी। इस दौरान कार्यवाहक तहसीलदार मोहन सिंह बिष्ट भी मौजूद रहे।
कोट
कर्मचारी हितों के लिए ही टीम यहां पहुंची है। टीम ने यहां फैक्ट्री की अचल संपत्ति का ब्यौरा एकत्र किया है। इसका आकलन करने के बाद टेंडर प्रक्रिया से नीलामी की कार्यवाही की जाएगी। उससे मिलने वाली राशि से कर्मचारियों और आरसेल कंपनी के देयकों का भुगतान किया जाएगा। शेष राषि भारत सरकार के खाते में जमा कराई जाएगी।
- सौरभ इंदौरा, कंपनी अभियोजक, कारपोरेट मंत्रालय, भारत सरकार।