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बीपीएड धारकों के मामले में सरकार को जवाब देने के निर्देश
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नैनीताल। हाईकोर्ट ने बीपीएड धारकों के मामले में दायर याचिका पर सुनवाई के बाद सरकार को तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार हिमांशु कुमार और17 अन्य ने हाइकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि 2010 तक बीपीएड डिग्री धारकों को राज्य के प्राइमरी विद्यालयों में विशिष्ट बीटीसी के माध्यम से नियुक्ति देने का प्रावधान था लेकिन सरकार ने 2012 में इस नियमावली में संशोधन कर बीपीएड डिग्रीधारकों को इससे वंचित कर दिया। याचिका में कहा कि 4 जुलाई 2012 को निदेशक प्रारंभिक शिक्षा ने सरकार को पत्र लिख कर कहा कि 2009 की शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत बालकों के शारीरिक विकास के लिए अनुदेशकों की नियुक्ति के लिए 2012 की नियमावली को संशोधन किया जाए लेकिन उनके इस पत्र पर सरकार ने अमल नहीं की जबकि प्राथमिक विद्यालयों में योग एवं शारीरिक शिक्षा का पाठ्यक्रम एनसीईआरटी द्वारा पूर्व से ही निर्धारित है।
पूर्व में कोर्ट ने निदेशक प्रारंभिक शिक्षा को निर्देश दिए थे कि वे इस मामले में निर्णय लें। कोर्ट के आदेश के बाद भी इस मामले में कोई निर्णय नहीं लिया गया। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने सरकार को तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
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न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार हिमांशु कुमार और17 अन्य ने हाइकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि 2010 तक बीपीएड डिग्री धारकों को राज्य के प्राइमरी विद्यालयों में विशिष्ट बीटीसी के माध्यम से नियुक्ति देने का प्रावधान था लेकिन सरकार ने 2012 में इस नियमावली में संशोधन कर बीपीएड डिग्रीधारकों को इससे वंचित कर दिया। याचिका में कहा कि 4 जुलाई 2012 को निदेशक प्रारंभिक शिक्षा ने सरकार को पत्र लिख कर कहा कि 2009 की शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत बालकों के शारीरिक विकास के लिए अनुदेशकों की नियुक्ति के लिए 2012 की नियमावली को संशोधन किया जाए लेकिन उनके इस पत्र पर सरकार ने अमल नहीं की जबकि प्राथमिक विद्यालयों में योग एवं शारीरिक शिक्षा का पाठ्यक्रम एनसीईआरटी द्वारा पूर्व से ही निर्धारित है।
पूर्व में कोर्ट ने निदेशक प्रारंभिक शिक्षा को निर्देश दिए थे कि वे इस मामले में निर्णय लें। कोर्ट के आदेश के बाद भी इस मामले में कोई निर्णय नहीं लिया गया। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने सरकार को तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
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