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स्ट्रीट वेंडर्स को हटाने के मामले में सरकार, नैनीताल पालिका को जवाब देने के निर्देश

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Thu, 30 Dec 2021 02:54 AM IST
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Instructions to respond to the government, Nainital Municipality in the matter of removal of street vendors
नैनीताल। हाईकोर्ट ने सर्वे कराए बिना स्ट्रीट वेंडर्स को हटाने के मामले में नेशनल हॉकर फेडरेशन ऑफ इंडिया की जनहित याचिका पर अगली सुनवाई के लिए 6 फरवरी की तिथि नियत की है। सुनवाई के दौरान सरकार व नगरपालिका नैनीताल ने कोर्ट को बताया कि न्यायालय के आदेश पर उन्होंने नैनीताल में स्ट्रीट वेंडर को चिह्नित कर लिया है। उन्हें नगरपालिका द्वारा लाइसेंस देकर कारोबार के लिए जगह भी दे दी गई है। इसके बाद भी कई लोग बिना लाइसेंस के वेंडर जोन में बैठ जाते हैं। इस पर कोर्ट ने सरकार व नगरपालिका नैनीताल को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए।
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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय कुमार मिश्रा एवं न्यायमूर्ति एनएस धानिक की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। नेशनल हॉकर फडरेशन ने हाईकार्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि उत्तराखंड में लगभग 10187 स्ट्रीट वेंडर्स हैं। सरकार ने अभी तक स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट 2014 का अनुपालन नहीं किया है जिसमें प्रावधान है कि स्ट्रीट वेंडर्स के लिए एक निर्धारित जगह होगी।उन्हें संबंधित कॉरपोरेशन लाइसेंस देगा। उनको हटाने से पूर्व समाचारपत्रों में विज्ञप्ति जारी करनी होगी। पहचान के लिए वेंडर्स निर्धारित स्थान पर लाइसेंस, आधार कार्ड और राशन कार्ड रखेंगे। याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में एक निर्णय देकर कहा था कि सभी राज्य अपने यहां सभी स्ट्रीट वेंडर्स का चार माह के भीतर सर्वे कर एक स्ट्रीट टाउन वेंडर्स कमेटी का गठन करें। कमेटी में कॉरपोरेशन, पुलिस, प्रशासन, व्यापार मंडल तथा अन्य जानकार लोग होंगे लेकिन प्रदेश में अभी तक न तो सर्वे हुआ और ना ही वेंडर्स जोन घोषित हुआ। कमेटी का गठन भी नहीं हुआ। इसके चलते आए दिन इन लोगों का सामान जब्त किया जा रहा है जबकि सामान जब्त करने व उसे तोड़ने का अधिकार किसी को नहीं है। जब्त किए गए खाने के सामान को एक दिन में और अन्य सामान को तीन दिन में वापस करने का नियम है अन्यथा इसके एवज में मुआवजे का प्रावधान है। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सरकार और नगरपालिका नैनीताल को 6 फरवरी 2022 तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
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