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अंडरपास निर्माण के मामले में रेलवे बोर्ड को एक सप्ताह में स्थिति बताने के निर्देश
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नैनीताल। हाईकोर्ट ने पीरूमदारा (रामनगर) में कंडी मार्ग (रिंग रोड) रेलवे क्रॉसिंग पर निर्माणाधीन अंडरपास के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद रेलवे बोर्ड को एक सप्ताह के भीतर पूरी स्थिति से अवगत कराने के निर्देश दिए हैं। वरिष्ठ न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
रामनगर निवासी लखवीर सिंह और अन्य ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि रेलवे क्रॉसिंग गेट नंबर 46बी पर बन रहा अंडरपास रेलवे बोर्ड के मानकों के विपरीत तकनीकी संस्तुति के बिना बन रहा है। याचिका में कहा गया कि जिस तरह से अंडरपास बनाया जा रहा है, उससे स्थानीय लोगों को भविष्य में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। इस निर्माण के विरुद्ध ग्राम सभा पीरूमदारा सहित क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने कई बार रेलवे बोर्ड के उच्चाधिकारियों को प्रत्यावेदन दिया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों का कहना है कि निर्माणाधीन अंडरपास में खामियां ही खामियां हैं। निर्माण स्थल पर तीक्ष्ण ढलान है। चौड़ाई और ऊंचाई काफी कम है। बरसात में जलभराव से कई गाड़िया फंस सकती हैं। पास से गुजर रही नहर कुलावा नंबर 5 का अस्तित्व ही समाप्त हो गया है। इससे 125 एकड़ सिंचित भूमि भी प्रभावित हो जाएगी। याचिकाकर्ता ने निर्माण कार्य को रोकने और उच्च स्तरीय तकनीकी कमेटी से संस्तुत प्लान के तहत ही अंडर पास का निर्माण कराने की मांग की है।
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रामनगर निवासी लखवीर सिंह और अन्य ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि रेलवे क्रॉसिंग गेट नंबर 46बी पर बन रहा अंडरपास रेलवे बोर्ड के मानकों के विपरीत तकनीकी संस्तुति के बिना बन रहा है। याचिका में कहा गया कि जिस तरह से अंडरपास बनाया जा रहा है, उससे स्थानीय लोगों को भविष्य में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। इस निर्माण के विरुद्ध ग्राम सभा पीरूमदारा सहित क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने कई बार रेलवे बोर्ड के उच्चाधिकारियों को प्रत्यावेदन दिया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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ग्रामीणों का कहना है कि निर्माणाधीन अंडरपास में खामियां ही खामियां हैं। निर्माण स्थल पर तीक्ष्ण ढलान है। चौड़ाई और ऊंचाई काफी कम है। बरसात में जलभराव से कई गाड़िया फंस सकती हैं। पास से गुजर रही नहर कुलावा नंबर 5 का अस्तित्व ही समाप्त हो गया है। इससे 125 एकड़ सिंचित भूमि भी प्रभावित हो जाएगी। याचिकाकर्ता ने निर्माण कार्य को रोकने और उच्च स्तरीय तकनीकी कमेटी से संस्तुत प्लान के तहत ही अंडर पास का निर्माण कराने की मांग की है।
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