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झोपड़ी में आग के बीच फंसे मासूम की मौत

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 20 May 2020 02:15 AM IST
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Innocent trapped in a hut fire
ांमनगर झोपड़ी में लगी आग। - फोटो : RAMNAGAR
रामनगर (नैनीताल)। खाना बनाते हुए चूल्हे की आग से एक झोपड़ी जलकर राख हो गई। अग्निकांड में झोपड़ी के अंदर सो रहे छह महीने के बच्चे की जलकर मौत हो गई, जबकि उसकी बहन बच गई। दमकल विभाग की दो गाड़ियों ने आग पर काबू पाया। बच्चे की मौत से मां-बाप का रो-रोकर बुरा हाल था। पुलिस ने पंचनामा भर शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया।
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ग्राम बचाई जिला सोनभद्र उत्तर प्रदेश निवासी किशन पुत्र विश्वनाथ पीरूमदारा के भवानीपुर स्थित एक स्टोन क्रशर में डंपर चालक है। क्रशर के पास में झोपड़ी बनाकर पूरा परिवार रहता है। मंगलवार सुबह लगभग 10.30 बजे पत्नी अनीता खाना बनाकर बेटे नीरज (छह माह) और बेटी कुसुम (चार साल) को झोपड़ी में छोड़कर पानी लेने चली गईं। इतनी देर में चूल्हे की चिंगारी झोपड़ी की पुआल तक चली गयी। चिंगारी की आग से झोपड़ी जलने लगी। बेटी कुसुम किसी तरह से अपनी जान बचाकर झोपड़ी से बाहर भागी। जब आसपास के लोगों ने देखा तब तक आग विकराल रूप ले चुकी थी। सूचना मिलते ही रामनगर फायर स्टेशन के एफएचओ किशोर उपाध्याय दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। आग बुझाने तक 6 माह के नीरज की मौत हो गई। अग्निकांड से घर में रखा सारा सामान जल गया। उधर, सूचना मिलते ही रामनगर कोतवाल रवि सैनी, पीरूमदारा चौकी इंचार्ज कवींद्र शर्मा सहित पुलिस बल भी मौके पर पहुंचा। पुलिस ने नवजात शिशु के शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम करावकर परिजनों के सुपुर्द किया।
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भाई जलता रहा, बच्ची कुछ ना कर सकी
रामनगर में मंगलवार को एक बहन के सामने उसके भाई की जलकर मौत हो गई और उम्र की लाचारी के कारण वह कुछ नहीं कर सकी। शोर शराबा सुनकर पड़ोसी मौके पर तो पहुंच गए, लेकिन वे आग की लपटों को देख मदद करने की हिम्मत नहीं जुटा पाए।
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रामनगर के भवानीपुर में हुए अग्निकांड ने भाई-बहन को हमेशा के लिए जुदा कर दिया। चार साल की कुसुम भीषण आग की लपटों के चलते चाहकर भी छोटे भाई नीरज को बचाने के लिए कुछ नहीं कर सकी। ताउम्र बच्ची को इसका मलाल रहेगा कि शायद वह बड़ी होती तो अपने भाई को बचा लेती। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जब वह मौके पर पहुंचे तब बच्ची आग लगी झोपड़ी को देखकर रो रही थी। उम्र कम होने के बावजूद वह भाई के जुदा होने का गम समझ रही थी।
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