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बाघ बचाने को इंडो-नेपाल अफसरों में मंथन

Sat, 31 Jan 2015 01:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हल्द्वानी
ब्यूरो/अमर उजाला, हल्द्वानी Updated Sat, 31 Jan 2015 01:52 AM IST
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Indo-Nepal officials meeting

बाघ को बचाने के लिए डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सहयोग से भारत-नेपाल के वनाधिकारियों की संयुक्त मीटिंग शुक्रवार को तिकोनिया स्थित विभागीय कार्यालय में हुई। इसमें बेहतर समन्वय के लिए निश्चित अंतराल पर दोनों तरफ के अफसरों की मीटिंग करने, समेत कुछ बिंदुओं पर सहमति बनी है।

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मीटिंग में शामिल तराई पूर्वी वन प्रभाग के डीएफओ डा. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि उत्तराखंड और नेपाल के जंगल आपस में जुड़े हैं, जिसमें वन्यजीवों का मूवमेंट होता है। ऐसे में दोनों तरफ एक जैसी चुनौतियां और समस्याएं हैं। मीटिंग में मुख्य रूप से वन्यजीव और जैव विविधता संरक्षण पर बातचीत हुई है। फरवरी से बार्डर पर संयुक्त गश्त करने का फैसला हुआ है।
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धकाते ने बताया कि हमने हाल में कई सूचनाओं का अदान-प्रदान किया, जिसके बाद कार्रवाई हुई। इस दौरान नेपाल आर्मी के प्रोटेक्शन यूनिट के ले. कर्नल श्रवण के बिष्टा, शुक्ला फाटक सेंचुरी के वन संरक्षक बेदकुमार धकाल शामिल थे, तो उत्तराखंड जंगलात की तरफ से डीएफओ हल्द्वानी चंद्रशेखर सनवाल, एसडीओ प्रकाश आर्य, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के तराई आर्क लैंड स्केप प्रमुख हरीश गुलेरिया, नेपाल के संगठन एमपीएनसी सुदर्शन, हेमंत यादव शामिल थे।
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बाघ के शिकारी भारत में छिपे
हाल ही में नेपाल में कई बाघों का शिकार हुआ है, इसमें 15 जनवरी को नेपाल के दोधारा चांदनी और 18 जनवरी को कंचनपुर में बाघ मारे गए। नेपाल वन विभाग की टीम ने पीलीभीत एवं लखीमपुर के रहने वाले गुलाल मंडल और अनुज पांडे को गिरफ्तार किया, पर शिकारी हत्थे नहीं चढ़ सके। नेपाल के वनाधिकारियों को आशंका है कि वह भारत में छिपे हो सकते हैं। इसके अलावा यह नेपाल से सटे उत्तराखंड आदि जगहों पर भी शिकार की कोशिश कर सकते हैं। ऐसे में इनकी धरपकड़ के लिए संयुक्त रणनीति बनाने पर भी विचार-विमर्श हुआ है।

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