{"_id":"57fcfd9b4f1c1b8e1528e2c5","slug":"in-real-life-social-officer-suresh","type":"story","status":"publish","title_hn":"असल जिंदगी में भी सामाजिक ‘अधिकारी’ हैं सुरेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
असल जिंदगी में भी सामाजिक ‘अधिकारी’ हैं सुरेश
निशांत खनी
Updated Wed, 12 Oct 2016 12:02 AM IST
विज्ञापन
कपड़ा बैंक
- फोटो : demopic
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जैसा पद और नाम ठीक वैसा ही काम। नगर निगम के सामाजिक विकास अधिकारी सुरेश अधिकारी अपने पद और नाम को सार्थक कर दूसरे के लिए प्रेरणास्रोत बने हैं। सुरेश अधिकारी ने नौकरी की भागदौड़ के बीच गरीबों की मदद के लिए कपड़ा बैंक खोला है।
विज्ञापन
यह बैंक उत्तराखंड का पहला बैंक है। इसमें दानदाता पुराने एवं नए कपड़े जमा कर रहे हैं, ताकि जरूरतमंद उन्हें पहन सकें। उनकी पहल से बैंक में चार सौ जोड़ी से अधिक कपड़े, जूते और स्कूली बच्चों के लिए पानी की बोतलें जमा हो चुकी हैं।
विज्ञापन
सुरेश अधिकारी विगत सात साल से नगर निगम में सामाजिक विकास अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। नौकरी से इतर भी सुरेश अधिकारी ने समाजसेवा का बीड़ा उठाया है।
एमबीपीजी कालेज में हिंदी के एसोसिएट प्रोफेसर संतोष मिश्रा के ‘नेकी की दीवार’ से प्रेरित होकर सुरेश अधिकारी ने गरीबों की मदद के लिए पिता की स्मृति में ‘गणेश कपड़ा बैंक’ खोला है। बैंक के लिए न केवल राजेंद्र नगर धोबीघाट में दुकान किराये पर ली है, बल्कि दो कर्मचारी भी मानदेय पर रखे हैं। इनमें एक महिला टेलर है।
विज्ञापन
कपड़ा बैंक में रोजाना कई लोग कपड़े देने और लेने पहुंचते हैं। पुराने फटे कपड़े आने पर टेलर उनकी सिलाई करती हैं। दूसरा सहायक कर्मचारी बैंक में जमा और बांटे जाने वाले कपड़ों और दूसरे सामान का रिकार्ड रखता है। सुरेश अधिकारी के मुताबिक हल्द्वानी में खोला गया कपड़ा बैंक उत्तराखंड का पहला है। बैंक दोपहर 12 बजे से शाम पांच बजे तक खुला रहता है।
अधिकांश लोगों के घरों में पुराने कपड़े, जूते, चप्पल, चादर, बर्तन बेकार पड़े होते हैं। बेकार सामान को या तो कबाड़ी को बेच देते हैं या फिर स्टोर रूम में फेंक देते हैं। ऐसा बेकार सामान किसी भी जरूरतमंद के लिए उपयोगी हो सकता है। घर में बेकार सामान को बैंक तक पहुंचाकर गरीबों की मदद में भागीदारी कर सकते हैं। - सुरेश अधिकारी
स्वच्छता का दिया संदेश
दो अक्तूबर गांधी जयंती पर भी सुरेश अधिकारी ने सरकारी विभागों के कर्मचारियों को स्वच्छता अभियान का संदेश दिया। सुरेश अधिकारी ने नगर निगम के शौचालयों में खुद साफ सफाई की। उनकी पहल पर बाकी कर्मचारियों ने भी हाथ बढ़ाया और निगम दफ्तर के शौचालय चमका दिए।