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वन भूमि और कच्ची जमीन में बसे किसान कैसे बेचेंगे धान ?
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हल्द्वानी। सरकार ने इस बार धान खरीद में खतौनी अनिवार्य कर दी है। खतौनी अनिवार्य होने से वन भूमि और कच्ची जमीन में बसे किसानों के सामने धान बेचने की समस्या पैदा हो गई है। कुमाऊं के करीब 20 हजार किसान इसके दायरे में आ रहे हैं। किसानों ने खतौनी हटाने की मांग की है। वहीं अधिकारियों का कहना है कि जिनके पास खतौनी नहीं है, वह अपने क्षेत्र के एसडीएम से लिखवाकर दे सकते हैं, जिसके बाद उनका धान खरीद जाएगा।
बिंदुखत्ता पूरा वन भूमि में बसा है। इसके अलावा खटीमा में थारू, बुक्सा जनजाति के पास भी पक्की जमीन नहीं है। बाजपुर में भी ऐसी ही जमीन है। ऊधमसिंह नगर जिले में डामों की जमीन में भी अवैध रूप से किसान धान-गन्ना आदि की फसल लेते हैं। अब इन किसानों के सामने धान बेचने का संकट आ गया है। पिछले साल तक सरकारी खरीद में खतौनी अनिवार्य थी। इस कारण ये किसान सरकारी तौल केंद्र में धान नहीं देते थे और कमीशन एजेंटों को धान बेचते थे।
इस बार धान खरीद नीति में कमीशन एजेंटों के लिए भी खतौनी अनिवार्य कर दी है। इस कारण कमीशन एजेंट इन किसानों का धान नहीं खरीद रहे हैं। इससे किसान औने-पौने दामों में धान की फसल बेच रहे हैं।
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जिन किसानों के पास खतौनी नहीं है, वह अपने एसडीएम से लिखवाकर दे सकते हैं। उनका धान खरीद जाएगा। - ललित मोहन रयाल, आरएफसी कुमाऊं
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बिंदुखत्ता पूरा वन भूमि में बसा है। इसके अलावा खटीमा में थारू, बुक्सा जनजाति के पास भी पक्की जमीन नहीं है। बाजपुर में भी ऐसी ही जमीन है। ऊधमसिंह नगर जिले में डामों की जमीन में भी अवैध रूप से किसान धान-गन्ना आदि की फसल लेते हैं। अब इन किसानों के सामने धान बेचने का संकट आ गया है। पिछले साल तक सरकारी खरीद में खतौनी अनिवार्य थी। इस कारण ये किसान सरकारी तौल केंद्र में धान नहीं देते थे और कमीशन एजेंटों को धान बेचते थे।
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इस बार धान खरीद नीति में कमीशन एजेंटों के लिए भी खतौनी अनिवार्य कर दी है। इस कारण कमीशन एजेंट इन किसानों का धान नहीं खरीद रहे हैं। इससे किसान औने-पौने दामों में धान की फसल बेच रहे हैं।
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जिन किसानों के पास खतौनी नहीं है, वह अपने एसडीएम से लिखवाकर दे सकते हैं। उनका धान खरीद जाएगा। - ललित मोहन रयाल, आरएफसी कुमाऊं