{"_id":"59d1491a4f1c1bd9798b46bc","slug":"how-clean-is-this-how-fortnight","type":"story","status":"publish","title_hn":"ये कैसी सफाई, ये कैसा पखवाड़ा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ये कैसी सफाई, ये कैसा पखवाड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 02 Oct 2017 01:29 AM IST
विज्ञापन
ये कैसी सफाई, ये कैसा पखवाड़ा
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नैनीताल जिले में सफाई के नाम पर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। सरकारी महकमा, नगर निगम सहित सभी विभाग सफाई पखवाड़ा मना रहे हैं। सफाई के नाम पर लाखों रुपये का बजट भी खर्च किया जा रहा है। इसके विपरीत नगर निगम, सिंचाई विभाग, ग्राम सभाओं का शहरी भाग कूड़े से भरा नजर आ रहा है।
विज्ञापन
जन जागरूकता फैलाने के नाम पर कई एनजीओ सरकार और उनके विभाग से मोटी रकम वसूल रहे हैं, लेकिन कहीं जन जागरूकता दिखाई नहीं दे रही है। वनभूलपुरा, इंद्रानगर, शनि बाजार सहित निगम के वार्ड में लोग नालों में कूड़ा डाल रहे हैं।
विज्ञापन
पॉलिथीन प्रतिबंधित, लेकिन नहीं हो रहा नियमों का पालन
हाइकोर्ट के आदेश का निगम और ग्रामीण क्षेत्रों में पालन नहीं हो रहा है। जिला प्रशासन पॉलिथीन को रोकने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है। लोग पॉलिथीन से होने वाली बीमारियों की जानकारी के बाद भी पॉलिथीन लेने से नहीं हिचकिचा रहे हैं। तीन महीने से नगर निगम प्रशासन और छह माह से जिला प्रशासन ने पॉलिथीन पर कोई अभियान नहीं चलाया है।
विज्ञापन
कानून बना, लेकिन तीन दिन के बाद ठंडे बस्ते में
खुले में कूड़ा फेंकने और थूकने पर नगर निगम क्षेत्र में जुर्माना लगाया जाएगा। ऐसा कानून है। इसके लिए बकायदा नगर आयुक्त के भेजे पत्र में डीएम ने कई अधिकारियों को जुर्माना लगाने के अधिकार दिए थे। तीन दिन तो निगम के अधिकारियों ने लोगों से जुर्माना वसूला। उसके बाद निगम प्रशासन ने आंखें मूंद ली। दूसरी ओर पुलिस अधिकारियों ने अभी तक एक भी जुर्माना नहीं वसूला है।
नगर निगम के नाले कूड़े से भरे हैं
नगर निगम ने नालों की सफाई के लिए इस बार भारी भरकम राशि का ठेका दिया था। इसके बावजूद नगर निगम के नाले गंदगी से भरे पड़े हैं। सफाई निरीक्षकों ने जो निगम को रिपोर्ट सौंपी थी, उसमें साफ कहा गया था कि ठेकेदार की ओर से नालों को साफ नहीं किया गया है।
एफटीआई रोड के किनारे कूड़े का ढेर
एफटीआई रोड को लोगों ने कूड़ा घर बनाना शुरू कर दिया है। यहां जैव चिकित्सीय कचरे के साथ शहर और आसपास का कूड़ा डाला जा रहा है। वैसे यह क्षेत्र नगर निगम के अंदर नहीं आता है। इसलिए निगम के अधिकारी आंख मूंदे हुए हैं। उधर, जिला प्रशासन के अधिकारियों ने भी इस पर कोई कार्रवाई नहीं की।
सिंचाई विभाग की नहर भी कूड़े से पटी
मंगलपड़ाव से लेकर तीनपानी तक नहर सिंचाई विभाग के अंदर आती है। तीन साल पहले इस नहर की सफाई की गई थी। उसके बाद सिंचाई विभाग के अधिकारी आंखें मूंद के बैठ गए। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद भी अधिकारियों के कानों में जूं तक नहीं रेंगी।
ठोस कूड़ा प्रबंधन के तहत अभी नहीं मिली जमीन
ठोस कूड़ा प्रबंधन के तहत सरकार से नगर निगम को चार एकड़ जमीन मिली थी। इसके एवज में नगर निगम ने पैसा और जमीन भी उपलब्ध करा दी थी। लेकिन दो साल से इस जमीन को पर्यावरणीय अनुमति नहीं मिली है। इस कारण ठोस कूड़ा प्रबंधन अभी फाइलों से ही नहीं निकल पाया है।