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सड़कों का मलबा जंगलों, खेत व नदियों में डालने पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Thu, 15 Jul 2021 02:09 AM IST
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High Court seeks answer for dumping road debris in forests, fields and rivers
नैनीताल। हाईकोर्ट ने राज्य में हो रहे सड़कों के निर्माण के दौरान उनका मलबा जंगलों, सड़क के किनारे, खेतों व नदियों में डाले जाने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद सचिव पीडब्ल्यूडी, सचिव फॉरेस्ट, मुख्य वन संरक्षक, रूरल रोड एजेंसी उत्तराखंड, पीएमजीएसवाई, सड़क परिवहन मंत्रालय भारत सरकार, बीआरओ, केंद्र व स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड तथा नेशनल इंस्टीट्यूट आफ डिजास्टर मैनेजमेंट को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
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मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ में मामले की सुनवाई हुई। हल्द्वानी निवासी अमित खोलिया ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों सहित मैदानी क्षेत्रों में सड़कों का निर्माण किया जा रहा है। निर्माण तय समय के भीतर पूरा नहीं हो रहा है। साथ ही सड़क निर्माण के दौरान मलबा नदियों, नालों, जंगलों, आसपास के क्षेत्रों और खेतों में डाला जा रहा है, जिससे पर्यावरण को नुकसान होने के साथ ही नदियों में मलबा जमा होने से बाढ़ जैसे हालात पैदा हो सकते हैं। कुछ दिन पहले बरसात होने के कारण कई गांवों में इन सड़कों का मलबा घुस गया और नाले बंद हो गए। काश्तकारों के खेत बह गए। सड़क निर्माण कर रही एजेंसी व प्रशासनिक अधिकारी पैसा बचाने के लिए मलबे का निस्तारण तय जगह के बजाय जहां-तहां कर रहे हैं।
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