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Nainital News: सांसद निधि के भुगतान को लेकर राज्य सरकार अन्य से जवाब तलब
Sat, 25 Feb 2023 01:35 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Sat, 25 Feb 2023 01:35 AM IST
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नैनीताल। हाईकोर्ट ने संशोधित विकास कार्यों की सूची के अनुसार पिथौरागढ़ - चंपावत से पूर्व राज्यसभा सदस्य महेंद्र सिंह माहरा की सांसद निधि के भुगतान करने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने मामले में राज्य सरकार, जिलाधिकारी और सीडीओ को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 18 जुलाई को होगी।
मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार पिथौरागढ़-चंपावत से पूर्व राज्य सभा सदस्य महेंद्र सिंह माहरा ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि कोविडकाल के दौरान केंद्र सरकार ने उनकी सांसद निधि बंद कर दी थी, जिसे केंद्र सरकार ने 2022 में फिर से सुचारू कर दिया। सुचारु करने पर उनकी ओर से प्रेषित विकास कार्यों के लिए ढाई करोड़ रुपये दिए गए। याचिकाकर्ता का कहना था कि पूर्व में दी गई विकास कार्यों की सूची में से कई कार्य सरकार ने अन्य मदों से कर दिए। 2022 में उन्होंने फिर से केंद्र सरकार को विकास कार्यों की संशोधित सूची जिले के नोडल अधिकारी के माध्यम से भेजी लेकिन संशोधित सूची जिले के नोडल अधिकारी ने केंद्र सरकार को नहीं भेजी। याचिकाकर्ता ने जनहित याचिका में कोर्ट से प्रार्थना की है कि उनके द्वारा जनहित में कराए गए विकास कार्यों की संशोधित सूची के अनुसार सांसद निधि का भुगतान किया जाए।
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मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार पिथौरागढ़-चंपावत से पूर्व राज्य सभा सदस्य महेंद्र सिंह माहरा ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि कोविडकाल के दौरान केंद्र सरकार ने उनकी सांसद निधि बंद कर दी थी, जिसे केंद्र सरकार ने 2022 में फिर से सुचारू कर दिया। सुचारु करने पर उनकी ओर से प्रेषित विकास कार्यों के लिए ढाई करोड़ रुपये दिए गए। याचिकाकर्ता का कहना था कि पूर्व में दी गई विकास कार्यों की सूची में से कई कार्य सरकार ने अन्य मदों से कर दिए। 2022 में उन्होंने फिर से केंद्र सरकार को विकास कार्यों की संशोधित सूची जिले के नोडल अधिकारी के माध्यम से भेजी लेकिन संशोधित सूची जिले के नोडल अधिकारी ने केंद्र सरकार को नहीं भेजी। याचिकाकर्ता ने जनहित याचिका में कोर्ट से प्रार्थना की है कि उनके द्वारा जनहित में कराए गए विकास कार्यों की संशोधित सूची के अनुसार सांसद निधि का भुगतान किया जाए।
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