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हाईकोर्ट के सरकार को स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो, नैनीताल
Updated Wed, 22 Jun 2016 12:00 AM IST
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हाईकोर्ट ने ग्राम पंचायत नानकमत्ता को नगर पंचायत का दर्जा देने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद सरकार को दो सप्ताह में स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की संयुक्त खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। ग्राम तपेडा नानकमत्ता निवासी नरेंद्र सिंह राणा ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर ग्राम पंचायत नानकमत्ता को नगर पंचायत का दर्जा दिए जाने को चुनौती दी थी।
याचिकाकर्ता का कहना था कि ग्राम पंचायत नानकमत्ता में अधिकतर लोग थारू जनजाति के निवास करते हैं तथा खेती-बाड़ी का व्यवसाय करते हैं। याचिका में यह भी कहा गया कि नगर पंचायत बनाते समय शासन की ओर से ग्रामवासियों की राय नहीं ली गई। ग्रामवासियों के विरोध के बावजूद सरकार ने नगर पंचायत बनाने की अधिसूचना जारी कर दी।
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कहा कि जनता द्वारा चुनी गई ग्राम प्रधान जो कि थारू जनजाति से है, उसे उसके कार्यकाल से पहले ही हटा दिया गया जो थारू समुदाय के साथ अन्याय है। नगर पंचायत बनने से उन लोगों को जो ग्राम पंचायतों को सुविधाएं दी जाती हैं उनसे वंचित रहना पड़ सकता है। जैसे मनरेगा और अन्य ग्रामीण क्षेत्र की योजनाएं, जिससे उनके गांवों का विकास नहीं हो पाएगा। याचिकाकर्ता का यह भी कहना था कि नगर पंचायत बनने से सारी योजनाओं का लाभ नानकमत्ता के लोगों को ही मिलेगा। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सरकार को दो सप्ताह के भीतर स्थिति स्षष्ट करने के निर्देश दिए।
मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की संयुक्त खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। ग्राम तपेडा नानकमत्ता निवासी नरेंद्र सिंह राणा ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर ग्राम पंचायत नानकमत्ता को नगर पंचायत का दर्जा दिए जाने को चुनौती दी थी।
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याचिकाकर्ता का कहना था कि ग्राम पंचायत नानकमत्ता में अधिकतर लोग थारू जनजाति के निवास करते हैं तथा खेती-बाड़ी का व्यवसाय करते हैं। याचिका में यह भी कहा गया कि नगर पंचायत बनाते समय शासन की ओर से ग्रामवासियों की राय नहीं ली गई। ग्रामवासियों के विरोध के बावजूद सरकार ने नगर पंचायत बनाने की अधिसूचना जारी कर दी।
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कहा कि जनता द्वारा चुनी गई ग्राम प्रधान जो कि थारू जनजाति से है, उसे उसके कार्यकाल से पहले ही हटा दिया गया जो थारू समुदाय के साथ अन्याय है। नगर पंचायत बनने से उन लोगों को जो ग्राम पंचायतों को सुविधाएं दी जाती हैं उनसे वंचित रहना पड़ सकता है। जैसे मनरेगा और अन्य ग्रामीण क्षेत्र की योजनाएं, जिससे उनके गांवों का विकास नहीं हो पाएगा। याचिकाकर्ता का यह भी कहना था कि नगर पंचायत बनने से सारी योजनाओं का लाभ नानकमत्ता के लोगों को ही मिलेगा। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सरकार को दो सप्ताह के भीतर स्थिति स्षष्ट करने के निर्देश दिए।